फरियादी को न्याय मिलने में देरी क्यों? पुराने भूमि विवाद में कब्जा वारंट जारी, कोर्ट के आदेश से प्रशासन हरकत में, 30 जुलाई तक कार्रवाई के निर्देश…

0
32

वासु सोनी चांपा। जिले से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, वर्षों से लंबित भूमि विवाद मामले में व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, चांपा द्वारा कब्जा वारंट जारी किया गया है, दस्तावेज़ों के अनुसार, दीवानी निष्पादन प्रकरण क्रमांक 05/2012 में उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि डिक्रीधारी नारायण प्रसाद को उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप तुलसी देवांगन पिता सोढूराम, चन्द्रिका देवांगन पिता सोढूराम, राजन देवांगन पिता सोढूराम, मंगलचंद देवांगन पिता सोढूराम से भूमि का कब्जा दिलाया जाए, इसके लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को विधिवत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय ने कलेक्टर, तहसीलदार और हल्का पटवारी को आवश्यक समन्वय स्थापित कर कब्जा वारंट की तामील सुनिश्चित करने तथा 30 जुलाई 2026 तक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में यह भी उल्लेख है कि यदि कब्जे में कोई अवैध निर्माण या बाधा हो, तो नियमानुसार कार्रवाई कर भूमि का कब्जा डिक्रीधारी को दिलाया जाए हालांकि इस मामले के सभी पक्षों की बात सामने आना अभी बाकी है। प्रशासन द्वारा गठित जांच दल ने निरीक्षण कर पंचनामा रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दिया है।

आपको बता दे कि जांजगीर-चांपा के वर्षों पुराने भूमि विवाद मामले में न्यायालय द्वारा कब्जा वारंट जारी किए जाने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। इस मामले में वादी नारायण प्रसाद से बातचीत करने पर उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे और अब न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन निष्पक्ष तरीके से कब्जा दिलाने की कार्रवाई करेगा। वहीं इस पूरे मामले में जब मौके पर मौजूद राजस्व निरीक्षक (RI) से पक्ष जानने और बाइट लेने का प्रयास किया, तो उन्होंने इस विषय पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी या बाइट देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि न्यायालय के निर्देशों का पालन किस प्रकार होगा?

वादी नारायण प्रसाद ने बताया न्यायालय से कब्जा आदेश मिलने के बाद भी राजस्व अधिकारियों द्वारा सिर्फ जांच किया जा रहा है। वादी नारायण के द्वारा पूछने पर राजस्व टीम के द्वारा सिर्फ जांच कर रिपोर्ट देने संबंधी बातें कही जा रही है। वहीं राजस्व टीम भी इस मामले में सिर्फ अगल बगल झांक रही है। उन्हें यह दिक्कत महसूस हो रही है कि आखिर वादी को कब्जा कैसे दिलाएं, क्योंकि न्यायालय से प्राप्त आदेश में किसी भी प्रकार का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
बहरहाल देखने वाली बात होगी कि न्यायालय के आदेश के बाद वादी नारायण को न्याय मिल पाएगा या वादी नारायण प्रसाद दर दर की ठोकरें ही खाता रहेगा?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here