इन महिलाओं को ‘लाडकी बहिन योजना’ के तहत नहीं मिलेंगे पैसे? अयोग्य लाभार्थियों की जांच कराएगी सरकार

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महाराष्ट्र सरकार ने अपनी बड़ी लाडकी बहिन योजना के तहत उन महिलाओं की पहचान करना शुरू कर दिया है जिन्होंने इस योजना का लाभ लिया है. सरकार ऐसे लोगों की पहचान करने जा रही है जिनके पास चौपहिया वाहन है.  इसके बावजूद उन्होंने इस योजना का लाभ लिया है. इस योजना के तहत जिन महिलाओं की वार्षिक पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है और उनके परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है, इस योजना के तहत सरकार प्रति माह 1,500 रुपये प्रदान करती है.

पुणे के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का लाभ अकेले पुणे जिले से 21 लाख से अधिक महिलाओं ने लिया है. इस योजना की एक और शर्त है कि लाभार्थियों को किसी अन्य सरकारी योजना से मासिक सहायता नहीं मिलनी चाहिए और उनके पास चौपहिया वाहन नहीं होना चाहिए.

सरकार के इस कदम पर कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) ने तीव्र विरोध जताया है और इसे महिलाओं का अपमान बताया है, जबकि विपक्ष ने इसे धोखाधड़ी बताया है.

पुणे जिला परिषद के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी जामसिंह गिरसे ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा “हम महिलाओं की योग्यता को रद्द करने की प्रक्रिया ही लागू करेंगे. इसके अलावा न तो कोई जांच की जाएगी और न ही उन पर कोई जुर्माना लगाया जाएगा,” गिरसे ने कहा, “हमने आरटीओ से ऐसी महिलाओं की सूची मांगी है. हम उसी सूची के आधार पर कार्य करेंगे.यह प्रक्रिया लगभग एक महीने में पूरी हो सकती है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारी घर-घर जाकर इसका सत्यापन नहीं करेंगे.

इस बीच, पिंपरी-चिंचवड के इंद्रायणी नगर क्षेत्र की एक महिला लाभार्थी ने बताया कि वह एक चौपहिया वाहन 10 साल पहले खरीदी थी. उन्होंने कहा, “मैंने तीन साल पहले अपनी नौकरी खो दी थी, अब मुझे कोई वेतन नहीं मिलता है. लेकिन मेरे पास एक चौपहिया वाहन है जो मैंने नौकरी करते वक्त खरीदी थी तो मैं क्या करूँ?” गिरसे ने कहा, “सरकारी निर्देशों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के नाम पर चौपहिया वाहन है तो वह योजना से बाहर हो जाएंगे.”

पुणे शहर कांग्रेस के प्रवक्ता गोपाल तिवारी ने सरकार की इस कार्रवाई को “अमानवीय” और “महिलाओं का अपमान” बताया “कुछ महिलाओं के पास चौपहिया वाहन हो सकता है, कई ने ये वाहन कोविड-19 महामारी से पहले खरीदे थे, महामारी के दौरान कई पुणेवासियों की नौकरियां चली गईं,” EMI चुकता करने की स्थिति में नहीं थे; कुछ लोग अभी भी नौकरी की तलाश में हैं. अगर किसी व्यक्ति के पास अब भी कार है लेकिन वे बेरोजगार हैं, तो क्या सरकार उन्हें अयोग्य ठहराएगी? यह केवल सरकार की अमानवीय और महिलाओं के प्रति अपमानजनक मानसिकता को दर्शाता है.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के प्रवक्ता महेश तपासे ने कहा, “मैं यह फिर से कहना चाहता हूं कि ऐसा कदम महाराष्ट्र की महिलाओं के साथ सीधा धोखा होगा. पहले महायुति सरकार ने उन्हें वोट हासिल करने के लिए मासिक सहायता का वादा किया, अब सत्ता में आने के बाद वे महिलाओं से यह लाभ छीनना चाहते हैं. यह खुलेआम धोखाधड़ी के सिवा कुछ नहीं है.”

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