चांपा स्टेशन के प्लेटफार्म नं. 01 में फिर से निकल पड़ी गंगा की धार…

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वासु सोनी चांपा। रेलवे की हालत किसी से छुपी हुई नहीं है। लेकिन चांपा स्टेशन के अधिकृत अधिकारियों का हाल कुछ बेहाल हो रखा है। उन्हें काम की चिंता तो है लेकिन ये कैसी चिंता? कई मामलों में चांपा स्टेशन के अधिकारियों को पता तक नहीं रहता, जब तक कोई शिकायत ना करें। चलो मान लिया कि शिकायत के बिना काम नहीं हो सकता लेकिन ऐसे अधिकारियों को ये चिंता भी बनी रहती है कि आखिर शिकायत किसने की और क्यों?
आपको बताते चलें कि स्टेशन में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा काम करने का तरीका भी वैसा भी है जैसा उनका हिसाब होता होगा? कुछ दिन पहले फिर से नल के टोंटी से गंगा की धारा बह रही थी। जो आने जाने वाले यात्रियों को गंगा स्नान का सुख दे रहा था। हालांकि गर्मी का दिन है कोई शिकायत करे भी तो कैसे? आने जाने वाले मजा ले रहे थे लेकिन स्टेशन की चिंता करने वाले अधिकारियों को इस बात की कोई चिंता ही नहीं थी। फिलहाल स्टेशन के अधिकृत अधिकारी जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई जरूर करते हैं तब तक स्टेशन में आने जाने वाले यात्री गंगा स्नान का आनंद जरूर ले रहे होते हैं।
सामान लोकल कंपनी का, बिल भारी भरकम
यह बात किसी से छुपी नहीं है कि शासकीय कार्य में सामान और काम की गुणवत्ता भगवान भरोसे रहता है। कहते हैं कि जनता द्वारा दिए गए टैक्स के रूपयों से सारे शासकीय कार्य और भुगतान किये जाते है लेकिन अधिकारी और ठेकेदार उन टैक्स के रूपयों का उपयोग भरपूर रूप से करते नजर आते हैं, हालांकि इस बात की पुष्टि करना आसान कार्य नहीं रहता, विभाग से जानकारी लेने एडी चोटी की जोर लगानी पड़ती तब जाकर जनता के द्वारा टैक्स के रूप में दिए गए रूपयों का उपयोग कैसे होता है यह पता चलता है। हालांकि रेल विभाग अपने टेक्निकल विभाग पर पूरा भरोसा जताता है लेकिन आए दिन नल की टोंटी से गंगा की धार बहना पूरे भरोसे को बहा कर ले जाती है।
फिलहाल चांपा स्टेशन में चल रहे निर्माण कार्य में आए दिन कुछ ना कुछ कमी देखने को जरूर मिल जाती है लेकिन रेल विभाग के अधिकृत अधिकारी अपनी ढफली अपना राग अलापने मजबूर नजर आते हैं।

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