5 दिन बाद भी रेलवे के अधिकारी नहीं दे पाए जवाब, क्या बिना पढ़े लिखे अधिकारी कर रहे रेलवे में काम? नगर की उपेक्षा के बाद जवाब क्यों नहीं दे पा रहे रेलवे के अधिकारी कर्मचारी? 

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वासु सोनी चांपा। बीते बुधवार को रेलवे के उच्च अधिकारी चांपा निरीक्षण में पहुंचे लेकिन अधिकारी आम जनता और पत्रकारों से मिलना तो दूर बात करना भी मुनासिब नहीं समझा गया। शायद रेलवे विभाग में उच्च स्तर के पढ़े लिखे अधिकारी कार्य करते है लेकिन वे अपनी जिम्मेदारी भूलकर सिर्फ अपनी मनमर्जी करने आतुर है। लगातार देखा जा रहा है कि रेलवे के अधिकारियों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं रेलवे के अधिकारी नगर की उपेक्षा करने भी पीछे नहीं है। मुंबई हावड़ा रेलमार्ग का एक प्रसिद्ध रेलवे स्टेशन जिसकी उपेक्षा करने रेलवे के अधिकारी कोई कसर नहीं छोड़ रहें है। साथ ही आम जनता और पत्रकारों से दूरी बनाकर यह सिद्ध करने का प्रयास कर रहे है कि रेलवे के अधिकारी अपनी मर्जी से जो कुछ कर रहे है उसके लिए आम जनत और पत्रकारों की आवश्यकता नहीं है।

पीआरओ अंबिकेश साहू को मध्यस्थता बिगाड़ने के लिए मिलना चाहिए भारत रत्न?

रेलवे के अधिकारियों से पत्रकारों को कैसे दूर किया जाना चाहिए इसके लिए रेलवे के अधिकारी पीआरओ को सामने खड़े कर देते है और तो और पीआरओ पत्रकारों को बाद में बात करने की हिदायत देकर पीछा छुड़ा लेते है। जिसके लिए रेलवे के पीआरओ अंबिकेश साहू को भारत रत्न जैसे सम्मान से सम्मानित करना चाहिए। वहीं चांपा नगर के एक पत्रकार को फोन लगाने का झूठा दिलासा देकर रेलवे के अधिकारियों से मिलने नहीं देना और 5 दिन बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं देना, पीआरओ द्वारा पत्रकारों और अधिकारियों के बीच सम्बन्ध को बिगाड़ा जाना है। जबकि पीआरओ के द्वारा संवाद स्थापित किया जाना है ना कि बिगाड़ा जाना।

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