कोई फर्क नहीं पड़ता…सिर्फ समीक्षा बैठक, अधिकारियों को दिशा निर्देश और टाएं टाएं फ़िस्स… 

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वासु सोनी चांपा। जिले में काम हो या नगर में या गांव में सिर्फ एक ही गूंज शासकीय कार्यालयों में गूंजती रहती है और वो ही कमीशन की गूंज? अब आपको बताते चले कि ये कमीशन कौन है और कैसे काम करता है? बाकी कोई फर्क नहीं पड़ता…

जिले में उच्च अधिकारी प्रत्येक सप्ताह मासिक समीक्षा बैठक रखते है, जहां जिले में हो रहे विकास कार्य सहित जन कल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाना और उस पर अमल करना होता है लेकिन जैसे ही बैठक खत्म हो जाती है, सभी के मन से यही आवाज आती है अगले समीक्षा बैठक में देखेंगे, काम क्या करना? क्योंकि कोई फर्क नहीं पड़ता….

वहीं साप्ताहिक बैठक में जिले के उच्च अधिकारी सभी की राय सुनकर और विकास कार्यों का हिसाब किताब कर आवश्यक दिशा निर्देश देते नजर आते है तो वहीं दूसरी ओर अन्य अधिकारियों के मन में यही चलता है कि हर सप्ताह तो यही सुनते ही है क्या करना…आवश्यक दिशा निर्देश ही तो है बाकी कोई फर्क नहीं पड़ता…आगे आपको यह भी जानना है कि सभी साप्ताहिक समीक्षा बैठक के बाद जांजगीर चांपा जिले का हाल टाएं टाएं फ़िस्स…बाकी कोई फर्क नहीं पड़ता…

अधिकारियों को समय पर वेतन, समय पर कमीशन मिल ही जाता है, बाकी जनता तो समझदार है क्योंकि कोई फर्क नहीं पड़ता…

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