चांपा नगर के बीच बस्ती का मामला…शिकायत के बाद भी अनजान बने फिर रहे अधिकारी-कर्मचारी, पीएमओ में हुई शिकायत…पीड़ित को न्याय का इंतजार…

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वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा द्वारा आम जनता से खिलवाड़ करना आम बात बन चुका है। पालिका के अधिकारी कर्मचारी सिर्फ अपना राग अलापते नजर आते है। आपको बताते चलें कि नगर के बजरंग टाकीज के समीप नहरिया मोबाइल नामक दुकान संचालित है। जिसके संचालक विशाल अग्रवाल है। दुकान के समीप जमील सौदागर नामक व्यक्ति पान का ठेला लगाता है। जो अवैध तरीके से रोड और नाली के उपर संचालित किया जाता है। साथ ही पान ठेले के लगने से आसपास आने जाने वाले लोग वहां रूककर सामान लेते हैं। वहीं पान ठेले के संचालन से नशा करने वाले लोग नहरिया मोबाइल के गेट के सामने बैठकर गांजा आदि नशे के सामान का सेवन करते हैं। नहरिया मोबाइल के संचालक द्वारा कई बार पान ठेला के संचालक को अन्यत्र कहीं ठेला लगाने कहा गया बावजूद अपना अड़ियल रवैया अपनाकर मोबाइल दुकान संचालक को ही धमकाने उतारू हो जाता है। नशे का सेवन करने वाले लोगों से तंग आकर नहरिया मोबाइल दुकान के संचालक ने अपना दुकान ही बंद कर दिया।
किसके संरक्षण में चल रहा नशे का खेल
आसपास के लोगों ने बताया कि नशे का यह खेल इस स्थान पर लगातार जारी है। कई बार लोगों के मना करने के बाद भी जमील सौदागर अपनी मनमानी करते हुए ठेला का संचालन कर नशे का व्यापार कर रहा है। जिसके चलते आसपास के लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायत के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई
नहरिया मोबाइल दुकान संचालक द्वारा कार्यालय नगर पालिका परिषद चांपा, कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (रा.) चांपा, कार्यालय कलेक्टर जांजगीर चांपा को आफलाइन और आनलाइन दोनों प्रारूप में शिकायत भी दी गई है। बावजूद अवैध तरीके से ठेले का संचालन बदस्तूर जारी है। जिले के संबंधित विभाग भी इस पर कार्रवाई करने नाकाम नजर आ रहा है।
पीएमओ शिकायत पोर्टल में भी की गई शिकायत
जिले के संबंधित विभागों में शिकायत करने और उसका निराकरण नहीं होने पर प्रार्थी विशाल अग्रवाल ने प्रधानमंत्री कार्यालय के नाम पत्र लिखकर संबंधित ठेला संचालक और विभागों की शिकायत की है। वहीं प्रधानमंत्री शिकायत पोर्टल में भी आनलाइन शिकायत की गई है।
अब देखना यह है कि इतनें जगह शिकायत करने के बाद क्या प्रार्थी को न्याय मिल पाएगा? क्या प्रधानमंत्री कार्यालय में आम जनता द्वारा की गई शिकायत के बाद संबंधित विभागों पर कार्रवाई की जाएगी? क्या प्रार्थी अपनी दुकान दोबारा खोल पाएगा या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

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