तीर कमान (वासु सोनी)। अब ये क्या सुन लिया! जिले में पब्लिक के वर्क्स नाम का डिपार्टमेंट है। जहां कई कामों का निर्वहन किया जाता है। जिसमें प्रमुख रूप से रोड का काम होता है। अब रोड मतलब समझे गए होंगे, बहुत काम है बाबा!! कुछ छपने छापने वाले पहुंच गए, कुछ बातें होने लगी, अचानक दर्द बाहर आने लगा, वो काम का दर्द था या कामचोरी का…समझ तो गए होंगे…अचानक अधिकारी के दर्द बोल पड़े…दो तीन दिन की लगातार छुट्टी के बाद अचानक कई घंटों की समय सीमा, फिर अगले दो दिन दबाव में काम उफ्फ कैसे काम करे…मैडम ने तो यह भी कह डाला ऊपर से जिले के कलेक्टर भी अजब गजब…आखिर ये काम का दर्द था या कामचोरी का ये तो पब्लिक के वर्क्स वाले डिपार्टमेंट से ही पता चल पाएगा…छुट्टी की थकान इतनी की काम का दर्द बढ़ गया, ऊपर से मुखिया ने छुट्टी के बाद मीटिंग भी बुलवा ली, कर्मचारी करे भी तो क्या…दर्द ने जुबान की ढक्कन खोल दी…अगर ऐसा है तो सरकारी छुट्टी के बाद फिर छुट्टी मिल जाता तो मजा आ जाता…क्या करें मजबूरी है साहब तो साहब ठहरे…!

