चांपा स्टेशन का नया कारनामा: कुली द्वारा सामान ले जाने वाला रेट लिस्ट ही गायब, चांपा पार्सल आफिस के बोर्ड में बस लिखा है भाड़ा का रेट

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वासु सोनी चांपा। नगर के रेलवे स्टेशन में हरदम नया कारनामा देखने को मिल जाएगा लेकिन रेलवे के अधिकारियों को उससे कोई सरोकार नहीं है। आपको बताते चलें कि रेलवे स्टेशन मंे काम करने वाले कुली द्वारा यात्रियों का सामान ढ़ोने के लिए निर्धारित राशि रेलवे द्वारा तय की जाती है। जिसे रेलवे द्वारा प्रत्येक स्टेशन में बोर्ड बनाकर सार्वजनिक किया जाता है लेकिन चांपा, नैला जांजगीर सहित कई ऐसे स्टेशन है जहां कुली द्वारा यात्रियों का सामान ढ़ोने के लिए तय की राशि का बोर्ड कहीं भी नहीं लगाया गया है। इसके लिए जब रेलवे जोन आफिस के अधिकारियों से मोबाइल के माध्यम से जानकारी ली गई तो सभी एक दूसरे अधिकारियों द्वारा जवाब देने की बात कहने पल्ला झाड़ लिया, लेकिन किसी ने भी इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। वहीं दूसरी ओर चांपा रेलवे स्टेशन के पार्सल कार्यालय के बाहर बने बोर्ड में कई साल पुरानी राशि 50 रूपए लिखी गई है जिसे काटकर 70 रूपए लिखा गया है, जब इस बारे में पार्सल कार्यालय में ड्यूटी कर रहे कर्मचारी से पूछा गया तो उन्होंने कहा मुझे नहीं पता स्टेशन मास्टर बता पाएंगे, लेकिन जब चांपा स्टेशन मास्टर से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने पार्सल कार्यालय के अधिकारी से बात करने बात कही। जिससे स्पष्ट हो गया कि रेलवे में कार्यरत अधिकारी सिर्फ मामले को दबाने में लगे रहते है। फिलहाल चांपा रेलवे स्टेशन में कार्य कर रहे कुली किस रेट में सामान ढ़ो रहे हैं ये बताया नहीं जा सकता। पत्रकार द्वारा स्टेशन मास्टर से इस विषय में जानकारी लेने के बाद उन्होंने सभी कुली को बुलाकर खरी खोटी सुनाते हुए उचित राशि लेकर काम करने बात कहीं।
कैसे होगी कुली की पहचान?
रेलवे स्टेशन में कोई हाफ बांह की लाल शर्ट पहने दिख जाए जो उसे कुली समझने कोई अतिश्योक्ति नहीं मानी जा सकती, लेकिन जरूरी नहीं कि वह व्यक्ति कुली ही हो। रेलवे के नियमों के तहत जो भी कुली का कार्य करता है उसके लिए कोई कार्ड या पर्ची जारी नहीं होता बल्कि उसे रेलवे के द्वारा बिल्ला दिया जाता है जो कुली की पहचान मानी जाती है। लेकिन वर्तमान समय में कुली द्वारा बिल्ला लगाना अपनी तौहीन मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर बहुत ही कम रेलवे स्टेशन में कुली अपनी बांह में बिल्ला लगाए दिखते है। जानकारी लेने पर एक कुली ने बताया कि बिल्ला गुम जाने के डर से बिल्ला नहीं लगाया जाता। जिससे से साफ स्पष्ट है कि रेलवे के अधिकारी नियमों को हवाला देकर सारे कार्य कराना चाहते हैं लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों की शिकायत होने पर ही कार्रवाई की जाती है। जब तक शिकायत ना हो रेलवे का कोई भी अधिकारी उस विषय पर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझते।
अब देखना यह होगा कि रेलवे के उच्च श्रेणी के अधिकारी समाचार प्रकाशन के बाद कार्रवाई कर पाते हैं या फिर यह मामला भी हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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