आयोग तो 25 हजार जुर्माना लेगा, दे देंगे, वरिष्ठ अधिकारी को भी…

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जांजगीर चांपा। जिले के नहर विभाग में पानी के साथ पैसा भी खूब बहता नजर आता है। जिसके चलते जिले के अधिकारी कर्मचारी बेतहाशा खर्च कर अपने भ्रष्टाचारी खातों को छुपाने पीछे नहीं है। जल संसाधन विभाग के अंतर्गत आने वाले नहर विभाग के अनुविभागीय अधिकारी क्रमांक 01 पीके तिवारी इस खेल के मास्टर माइंड माने जाते हैं। उन्हें पता है कि जब कोई सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगे तो उनसे विवाद कर उन्हें कार्यालय से कैसे भगाना है। वहीं नहर विभाग के भ्रष्टाचार की पोल खोलने दस्तावेजों का सहारा लेने आम जनता आगे आते हैं तो उन्हें दस्तावेज नहीं मिल पाता बल्कि यह जवाब मिलता है कि राज्य सूचना आयोग को भी अंत में जवाब नहीं देने पर 25 हजार रूपए ही देने पड़ते हैं वो भी दे देंगे 25 हजार ही तो है। नहर विभाग के अधिकारी कर्मचारी यह भी कहते फिरते हैं कि अपने उच्च अधिकारियो को भी मैनेज कर लेंगे? आखिर जनता हमारा क्या कर सकता है। जिस नहर विभाग से गरीब किसानों को पानी का सहारा मिलता है उस विभाग के अधिकारी कर्मचारी विभाग की नैया डुबाने पीछे नहीं है। आखिर नहर विभाग के अधिकारी-कर्मचारी का क्या जायेगा? सरकारी सेवक है लेन-देन कर और आगे बढ़ सकते हैं? लेकिन जनता का हक मारना उन्हें बहुत ही आसानी से आता है। फिलहाल नहर विभाग के अधिकारी कर्मचारी सरकारी सेवक है। उनका तो यह भी मानना है कि देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी उनको नौकरी से नहीं हटा सकते।

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