कवि डॉ.कुमार विश्वास की ओजस्वी कविता-पाठ से गूँजा चक्रधर समारोह, दर्शक हुए भाव-विभोर

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रायगढ़। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह के मंच पर सुप्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास की ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण काव्य-पाठ ने समा बाँध दिया। उनकी कविताओं और गीतों ने दर्शकों को हँसी, भावुकता और विचारों की गहराई से भर दिया।

डॉ.कुमार विश्वास ने जब अपनी लोकप्रिय पंक्तियाँ तुझी से शाम हो जाना, तुझी से भोर हो जाना… सुनाईं तो पूरा सभागार तालियों की गडग़ड़ाहट से गूँज उठा। उन्होंने अपने काव्य पाठ में मिले हर जख्म को मुस्कान से सीना नहीं आया, अमरता चाहते थे पर जहर पीना नहीं आया…. जैसी मार्मिक रचनाएँ भी प्रस्तुत कीं। इन पंक्तियों ने श्रोताओं को जीवन की विडंबनाओं और मानवीय संवेदनाओं की सजीव अनुभूति कराई। इसके साथ ही उनकी प्रसिद्ध रचना कोई दीवाना कहता है, कोई पागल कहता है… पर श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक तालियाँ बजाईं। उनके व्यंग्य, शेरो-शायरी और सहज शैली ने कार्यक्रम को और भी रोचक और अविस्मरणीय बना दिया। समारोह में मौजूद दर्शकों ने तालियों की गूँज से अपने प्रिय कवि का स्वागत किया। डॉ. कुमार विश्वास की प्रस्तुतियों ने न केवल मंच की शोभा बढ़ाई बल्कि श्रोताओं के दिलों में साहित्य और कविता के प्रति गहरी छाप भी छोड़ी।

कवि डॉ. कुमार विश्वास युवा पीढ़ी के अत्यंत लोकप्रिय कलाकार है। उन्होंने देश की राष्ट्र भाषा हिंदी को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया है। उनका जन्म 10 फरवरी 1970 को हुआ। कवि डॉ. कुमार विश्वास की साहित्य में बहुत रुचि है। 2001 में उन्हें शोध के लिए पुरस्कृत भी किया गया है। उनके द्वारा फिल्मों में भी गीत लिखे गए है। उन्होंने रामकथा को भाव पूर्ण प्रस्तुत किया है। वे लेखनी, वाणी और कलम के धनी है। वे व्यंग्य बहुत ही पैनी प्रस्तुत करते है। उनके साथ युवा गीतकार श्री गौरव साक्षी, आगरा से आए वीर रस के युवा कवि ईशान देव, हास्य कवि दिनेश गौरवा और सुश्री अल्पना आनंद ने मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में उपस्थित श्रोतागणों ने डॉ. कुमार विश्वास की कविताओं को न केवल सुना, बल्कि उनकी भावनाओं को आत्मसात भी किया। पूरा माहौल साहित्य और काव्यरस से सराबोर हो गया। चक्रधर समारोह का यह कवि सम्मेलन श्रोताओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव साबित हुआ।

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