केंद्रीय रेल मंत्रालय का ठेका है भैया…कौन क्या कर सकता है?रात में दरवाजा लगने वाला था शायद लग गया होगा, नहीं लगा….

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चांपा। नगर का एकमात्र रेलवे स्टेशन जहां से लाखों की राजस्व रेल मंत्रालय को प्राप्त होता है। उसके बाद भी चांपा रेलवे स्टेशन की स्थिति के बारे में उच्च अधिकारी कर्मचारियों को भी संज्ञान लेना पड़ता है। क्योंकि उसकी वास्तविक स्थिति के बारे में उच्च अधिकारियों को जानकारी नहीं दी जाती। किसी अखबार या पोर्टल में खबर लगने के बाद अधिकारी संज्ञान लेना शुरू करते है। बावजूद स्थिति जस की तस बनी रहती है। रेलवे है साहब यहां कुछ भी हो सकता है।

आपको बता दें कि चांपा रेलवे स्टेशन में प्रीपेड एसी वेटिंग हाल बनाया गया है। उस प्रीपेड एसी वेटिंग हाल को ईंटेरना राइस प्राइवेट लिमिटेड को ठेका में संचालित करने दिया गया है। लेकिन बाथरूम को पारदर्शिता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। प्लास्टिक पॉलीथिन का दरवाजा बनाया गया है। जहां महिला पुरुष के आने जाने को आसानी से एसी कमरे में बैठ के देखा जा सकता है। वही ठेकेदार अपने संचालन का पूरा पैसा वसूल कर रहा है। लेकिन बाथरूम को ऐसा बनाने के पीछे क्या मंशा होगी। क्या ठेकेदार को इससे और अधिक लाभ होगा? वही जब इस बारे में रेलवे के सीपीआरओ से मोबाइल के माध्यम से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा दरवाजा शायद लगने वाला था लग गया होगा? इसके बाद भी उन्होंने प्रश्न खड़ा कर दिया। वही जब रेलवे स्टेशन जाकर प्रीपेड एसी वेटिंग हाल का जायजा लिया गया तो स्थिती जस की तस थी। शायद ठेकेदार रेलवे से अधिक शक्तिशाली होगा। जो खबर प्रकाशित होने के बाद भी बाथरूम का दरवाजा नहीं लगा पाया। अब देखना यह है कि रेलवे इस पर कार्रवाई करता है या यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

 

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