
वासु सोनी चांपा। दीपावली पर्व आते ही खुशियों का माहौल बन जाता है। कही मिठाई, कही पकवान, कही पटाखे सहित दीप पर्व लोगो के जीवन में खुशहाली लाता है। वही अवैध काम करने वालों की चांदी ही चांदी रहती है। जिसकी शुरुआत दीपावली पर्व के कुछ दिन पहले से होती है। नगर में पटाखों की गूंज के लिए अवैध तरीके से कई स्थानों में आवश्यकता से अधिक पटाखे संग्रहित किए जाते हैं, लेकिन क्या इसकी जानकारी प्रशासन को है? दूसरी ओर नगर के भालेराव मैदान में हर वर्ष को भांति इस वर्ष भी पटाखे का बाजार लग रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है क्या इसके लिए नगर पालिक परिषद चांपा और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालयों से अनुमति ली गई है? अगर अनुमति ली गई है तो क्या वे छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के अनुसार दी गई है? ऐसे कई सवाल जनता के मन में है लेकिन उनके जवाब देने अधिकारी विफल है। जवाब तो दूर अधिकारी बात करना तक मुनासिब नहीं समझते। वही उच्च अधिकारी के कार्यालय में लगातार चल रहे आवश्यक मीटिंग से क्या जनता को लाभ मिल पा रहा है?
भालेराव मैदान में लगा पटाखों का बाजार, बारूद की क्षमता का निर्धारण करेगा कौन?
हर साल की तरह इस साल भी भालेराव मैदान में पटाखों का बाजार लगा हुआ है लेकिन क्या पटाखों के बाजार में छत्तीसगढ़ शासन के नियमों का पालन किया जाएगा? अगर नियमों का पालन किया भी गया तो उसकी जांच कौन करेगा? अधिकारी आए दिन मीटिंग में ही व्यस्त रहते है। जिसका फायदा उठाकर लोग मनमानी करने लगते है। भालेराव में लगभग 60 से भी अधिक पटाखे की दुकान लगने जा रही है। जिसके लिए टेंट, लाइट, पानी की व्यवस्था सम्भवतः नगर पालिक परिषद् चांपा के द्वारा किया जा रहा है। जिसके लिए विशेष शुल्क का निर्धारण किया गया है। जो पहले की अपेक्षा कुछ अधिक हो चुका है। वही नियमों की बात करें तो छत्तीसगढ़ शासन के नियमों का शायद ही पालन किया जा रहा है। चूंकि नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी मीटिंग में व्यस्त थे जिनके कारण वे उनसे पूर्ण रूप से बात नहीं हो सकी। वहीं दूसरी ओर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से मोबाइल पर बात करने पर उन्होंने दीपावली त्यौहार मनाने के लिए विशेष छूट देने की बात कही, लेकिन छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के अनुसार पटाखा बाजार की व्यवस्था हो रही या नहीं इस पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी। साथ ही पटाखा व्यापारियों की बैठक रखने की बात कही।


