
वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा के कर्मचारियों का कारनामा अब विश्व विख्यात होने जा रहा है। नियम कायदों की बाढ़ लाने वाला देश का पहला नगर पालिका माना जा सकता है वहीं उनको पूरा करने में फिसड्डी साबित होने वाला दुनिया का पहला नगर पालिका भी माना जा सकता है।
आपको बता दें कि नगर पालिका परिषद चांपा में अगर आप किसी सामान्य सी जानकारी के लिए जाते है तो आपको अधिकारियों और वहां के कर्मचारियों द्वारा नियम कायदों को पूरी बाढ़ दिखाई जाएगी लेकिन उनको पूरा करने या बताने सालों का समय भी लग सकता है। शायद नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारियों को इसी बात की तनख्वाह सरकार दे रही है। जिसका ताजा उदाहरण कर्मचारियों की भाषा में बताने की कोशिश की जा रही है। नगर पालिका परिषद चांपा द्वारा गांधी भवन नामक भवन को किराए पर दिया जाता है लेकिन उसकी व्यवस्था भगवान भरोसे संचालित होती है। वर्तमान में कुछ दिनों पूर्व कोसमंदा के सोनी परिवार द्वारा श्रीमद भागवत कथा का आयोजन कराया जा रहा है। जिसमें सोनी परिवार के द्वारा कई खामियां नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारियों और कर्मचारियों को बताई गई बावजूद उनके कानों में जूं तक नहीं रेंगी। इस बारे में जब राजस्व विभाग के चैतराम डिंडोर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सारे नियम कायदे आवेदन कर्ता को बताए जाते है। सामान्य तौर पर साफ सफाई कराकर भवन किराए पर दिए जाने की बात कही गई। साथ ही भवन किराए पर देने संबंधी नियम के बारे में कुछ भी उचित जानकारी नहीं बताई गई।
वहीं दूसरी ओर पौनी पसारी से सम्बन्धित जब जानकारी कार्यपालन अभियंता योगेश राठौर से मांगी गई तब उन्होंने कहा कि मुझे जानकारी नहीं है मै उस समय चांपा नपा नहीं आया था। तब उनके द्वारा नगर पालिका चांपा में पीडब्ल्यूडी विभाग देख रहे बाबू जवाहर पटेल ने बताया आडिट चल रहा है फाइल वहां है शायद वित्तीय वर्ष 2021-2022 में बनने की जानकारी दी लेकिन कितने की लागत से बना है इसकी जानकारी नहीं दी। जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि नपा चांपा के कर्मचारियों को बिना फाइल देखे किसी भी चीज की जानकारी नहीं होती। बिना देखे वर्ष बस बता सकते है लेकिन लागत नहीं बता सकते।
जिससे ये प्रतीत होता है कि कई सालों से नपा चांपा में जमे कर्मचारी भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी में पीएचडी कर चुके है। वहीं अब देखना यह है कि नगर के आम जनता के सवालों का जवाब कब तक नहीं देंगे।

