
मैं पुराने मामलों को नहीं जानता…उसे क्यों पूछ रहे…मै अभी आया हूं : सीएमओ रामसंजीवन सोनवानी
तो क्या अब पुराने मामलों को रिटायर अधिकारी बताएंगे… नए अधिकारियों को नहीं रहती कुछ जानकारी तो क्यों रहे नौकरी?
लगभग 30 साल से भी अधिक समय से एक ही बाबू चला रहा लोक निर्माण शाखा, आखिर क्यों नहीं कर रहे अन्य की पदस्थापना, होनी चाहिए आय और संपत्ति की जांच?
वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा में नए आए सीएमओ रामसंजीवन सोनवानी से जब कोई भी पत्रकार या अन्य व्यक्ति कोई सवाल पूछने जाए तो उनका जवाब अधिकतर यही होता है कि आपको इससे क्या मतलब? अब आप ही बताए कि आम जनता से जुड़े सवालों का जवाब जब अधिकारी नहीं दे पा रहे तो नौकरी ही क्यों कर रहे है? ऐसे कई सवाल नगर पालिका परिषद में दफन हो चुके है जिसे बिहान खबर वेब न्यूज की टीम बाहर निकालने कोशिश कर रही है लेकिन ऐसे जवाब पढ़े लिखे अधिकारी से मिले तो कोई भी अचंभित हो सकता है?
आखिर क्यों नहीं देना चाहते जवाब?
नगर पालिका परिषद चांपा में ऐसे कई सवाल है जिसका जवाब अधिकारी एक दूसरे के ऊपर छोड़ अपना पल्ला झाड़ लेते है। वहीं जिले के उच्च अधिकारियों का नाम आने के बाद भी वे हाथ पे हाथ धरे बैठे रहते है। नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी अपनी मनमर्जी चलाते बैठे है। जिले, राज्य और केंद्र के अधिकारियों को सिर्फ अपनी रोटी सेकने से मतलब है। वे नगर पालिका परिषद चांपा में चल रहे भ्रष्टाचारी खेल को देखने तक नहीं आ सकते। जिसके चलते यह खेल बदस्तूर जारी है। कई मामलों में नगर के लोगों को अपनी एडी तक घिसनी पड़ गई है बावजूद नगर पालिक परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारी अपनी अतिरिक्त कमाई के पीछे लगे हुए है। नगर पालिका परिषद चांपा के दस्तावेजों की जांच की जाए तो लगभग जनता के हित के कामों की फाइल धूल खाते रखी हुई है जो किसी बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहे है। जिसका जवाब देना कोई भी अधिकारी कर्मचारी नहीं चाहते क्योंकि जवाब देते ही कई ऐसे खुलासे होंगे जिसकी उन्हें उम्मीद भी नहीं है। इसलिए वे जवाब देने बचते नजर आ रहे है।
पुराने मामलों में कितने की हेरा फेरी? 30 साल से जमा एक ही बाबू?
आखिर नगर पालिका परिषद चांपा के लोक निर्माण शाखा में कितने की हेरा फेरी हुई होगी? जिसके चलते लगभग 30 साल से भी अधिक समय से एक ही बाबू इस विभाग की देख रख कर रहा है? निविदा और निर्माण कार्य को लेकर कमीशन की बातें भी गुपचुप तरीके से लोगों के जुबां में आ ही जाती है। आखिर कितने मामलों में फाइलें लोक निर्माण विभाग में रोकी गई है। भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के नियम के अनुरूप समय सीमा में नगर पालिका परिषद चांपा के लोक निर्माण विभाग शाखा का सारा कार्य क्यों संचालित नहीं किया जा रहा है। कुछ दिन पहले भी निविदा रखा गया लेकिन समय सीमा के बाद गुपचुप तरीके से निविदा निपटा दिया गया। जिसके लिए बिना कैमरे लगे कमरे का चयन किया गया। जिसकी जानकारी बाहरी व्यक्ति, आम जनता सहित विभाग के भी किसी को जानकारी नहीं है। कई ऐसे सवाल है जिसका जवाब अधिकारी देना नहीं चाहते, शायद भ्रष्टाचार की पोल ना खुल जाए? आखिर निविदा में ऐसा क्या है जो सार्वजनिक नहीं किया जा सकता? आम जनता निविदा की प्रक्रिया देखना चाहती है लेकिन गोपनीयता की बात कहते हुए भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है?

