
वासु सोनी चांपा। कमीशन का लालच और ऊपरी कमाई ने नपा को ग्रहण लगा रखा है। केंद्र और राज्य की योजनाओं का बंदरबाट करने अधिकारी और कर्मचारी पीछे नहीं है वरन जिले के अधिकारी भी इनमें शामिल हैं या हो सकते है? नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी अपनी जेब गर्म करो योजना के तहत केंद्र और राज्य की योजनाओं के लिए निविदा आमंत्रित कर ठेकेदारों से काम करवा कर अपना खेल खेले जा रहे है। नगर पालिका परिषद चांपा की उच्च स्तरीय जांच करने पर सारी करतूतों का खुलासा हो सकता है लेकिन जांच करेगा कौन? ये सवाल हमेशा उठता है।
आपको बता दें कि नगर पालिका परिषद चांपा में कई योजनाओं की दुकानें कबाड़ में तब्दील हो चुकी है। वही कई दुकानें जर्जर हो चुकी है। जिन दुकानों का आबंटन हो चुका है उनकी किराए की राशि लाखों ने पहुंच चुकी है और तो और कई दुकानें कबाड़ बनकर चोरी भी हो चुकी है। नगर पालिका परिषद चांपा के कर्मचारियों की माने तो उन्हें सिर्फ दस्तावेज से मतलब है वास्तविक स्थित देखने उनके पास समय नहीं है वहीं कई योजनाओं को कबाड़ में तब्दील कर दस्तावेज से गायब भी कर दिया गया है। जिसका ताजा उदाहरण कई वर्ष पूर्व हुए कबाड़ सामानों के निविदा का है। जहां निविदा में कबाड़ के समान के लिए आवेदन और सारी प्रक्रिया हुई तो थी लेकिन कबाड़ का निविदा डालने वाले ने कबाड़ का सामान ही नहीं उठाया। वर्तमान समय में नपा का सारा कबाड़ गायब हो चुका है।
बहरहाल केंद्र और राज्य की योजनाओं का नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारी खुलकर बंदरबाट करने लगे हुए है। वही वास्तविक स्थिति कुछ और बयां कर रही तो दस्तावेज कुछ और बयां कर रहे। फिलहाल नगर पालिका परिषद चांपा में कई वर्षों से अपना राज चला रहे कर्मचारियों को जिला, राज्य तो दूर केंद्र का संरक्षण प्राप्त है। जिसके चलते नगर विकास नहीं बल्कि विनाश की ओर जा रहा है।

