नगर क्या जिले के अधिकारी भी नहीं लगा पा रहे कब्जे पर लगाम?

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वासु सोनी चांपा। नगर के मुख्य मार्गों पर होने वाले कब्जे से निजात दिला पाने नगर सहित जिले के अधिकारियों के भी पसीने छूट जा रहे है? जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि नगर के अधिकारी और जिले के अधिकारी सिर्फ कागजों में कार्रवाई और दिखावे की राजनीति करना जानते हैं। लगातार समाचार की सुर्खियों में बने रहने के बाद भी नगर के सड़कों पर होने वाले कब्जे पर कार्रवाई तो दूर अधिकारी उसी रास्ते से आना जाना करते हैं फिर भी उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं है। वहीं अधिकारियों के कार्यालय जाने पर वे दिखावे के लिए आवेदन जमा करने कहते हैं लेकिन उस आवेदन पर संबंधित कार्यालय क्या प्रतिक्रिया दिखाती है ये बताना भी मुनासिब नहीं समझते। कई बार यह भी देखा गया है कि समाचार प्रकाशित होने के बाद भी अधिकारी समाचार देखकर अनदेखा कर देते हैं। जैसे उन्हें इससे कोई मतलब ही नहीं। नगर की आधे से अधिक सड़कों पर कब्जा कर व्यापारी अपना व्यापार संचालित कर रहे हैं इसके बावजूद आज पर्यन्त नगर क्या जिले के अधिकारी भी मौन धारण कर बैठे हैं। इससे नगर की जनता भी यही समझने मजबूर हैं कि शायद अधिकारी और व्यापारियों की आपस में सांठ गांठ बदस्तूर जारी है।
हटाने दिया समय, लेकिन हो गया पूरा कब्जा?
कुछ समय पहले चांपा तहसीलदार प्रशांत पटेल द्वारा बेरियर चैक पर नगर पालिका परिषद चांपा के तमाम कर्मचारियों के साथ अवैध कब्जा हटाने मुहिम चलाया गया लेकिन लोगों की समझाईश पर उन्हें कब्जा हटाने समय दिया। लेकिन वर्तमान समय में वो कब्जा पूरा कर उस पर कमरे का निर्माण हो गया है। जिससे यही प्रतीत होता है कि अधिकारी सिर्फ दिखावे की राजनीति जानते हैं, जिस समय कब्जा हटाने गए उस समय कब्जा हट गया होता तो शायद आज कब्जे वाली जगह पर दो कमरे का निर्माण नहीं होता। वहीं समय समय पर अधिकारी द्वारा जांच दल गठित की जाती तो यह स्थिति शायद ही उत्पन्न होती।


आवेदन दो, जांच करेंगे?
वर्तमान समय की बात करें तो नगर में लगभग कई एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा हो चुका है साथ ही लगातार शासकीय भूमि पर कब्जा लगातार जारी है। वहीं शासकीय भूमि को बचाने अधिकारियों द्वारा बड़ी बड़ी बातें तो की जाती है लेकिन कब्जा हो जाने के बाद सिर्फ जेब गरम करने के सिवाय दूसरा कोई रास्ता नजर नहीं आता। कई बार तो अधिकारियों को कब्जा करने वाले ही धमकी और खरी खोटी सुना वहां से वापस लौटने मजबूर कर देते है। वहीं नगरहित की बात करने वाले जब अधिकारियों के पास पहुंचते हैं तो उन्हें नियमों की झड़ी लगाकर आवेदन देने कहा जाता है, उस पर भी जांच करने की बात कही जाती है। जिससे साफ स्पष्ट है कि नगर में अभी भी शासकीय भूमि पर कब्जा होने और उसे हटाने संबंधित आवेदन सिर्फ धूल खाते पड़े हैं। वहीं जांच के नाम पर कई आवेदन आज भी राजस्व कार्यालयों की शोभा बढ़ा रहे है।

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