वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा के भ्रष्टाचार का खासा उदाहरण नगर में चल रही साफ सफाई को देख कर लगाया जा सकता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्लेसमेंट कर्मचारियों के ठेकेदार को नगर पालिका परिषद चांपा द्वारा सालाना लगभग डेढ़ करोड़ से भी अधिक भुगतान किया जा रहा है। बावजूद नगर में सफाई की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। वहीं प्लेसमेंट कर्मचारी क्या क्या काम करते है ये भी कोई समझ नहीं पाता, आखिर डेढ़ करोड़ रुपए के प्लेसमेंट कर्मचारी काम क्या कर रहे है? वहीं नगर की स्थिति का जायजा लें तो पता चलता है कि नगर में कई स्थानों में कूड़ा करकट सहित बजबजाती नालियां ओर रोड में कचरे का अंबार लगा हुआ है। अगर रोजाना साफ सफाई का कार्य होता है तो गंदगी फैली क्यों रहती है? सुबह से प्लेसमेंट कर्मचारियों की ड्यूटी सफाई के लिए लगा दी जाती है। बावजूद चांपा नगर कचरे के अंबार में बैठा रहता है। सिर्फ कमिशन के लिए इतने रुपयों का वारा न्यारा किया जाता है। वहीं नगर पालिका में कार्यरत कर्मचारी अपनी कुर्सी तोड़ने के सिवाय अन्य काम नहीं कर पाते, उन्हें ये जानकारी भी नहीं होती कि नगर का आलम क्या है? ठेकेदारी प्रथा में कमिशन लेकर रुपए भुगतान भी कर दिया जाता है। लेकिन वास्तविक स्थिति तब सामने आती है जब मौके पर जाकर देखा जाता है परन्तु नगर का विकास करने वाले नगर पालिका परिषद के अधिकारी और कर्मचारियों को शायद निविदा और उसके तथाकथित कमीशन की ज्यादा चिंता होती है? इसलिए उनके पास नगर विकास के लिए समय कम और बाकी के लिए आप समझदार तो है ही?

