नगरपालिका चांपा में निविदा का खेल, क्या जांच करवा पाएंगे कलेक्टर? बिना कैमरे वाले बंद कमरे में ही क्यों होती है बैठक, सार्वजनिक बातें भी होती है बंद कमरे में, कहीं अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठ गांठ तो नहीं?

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वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा में निविदा को लेकर बड़ा खेल जारी है। संभवतः किसी ने जांजगीर चांपा जिले के कलेक्टर से शिकायत भी कर दी। जिस पर अब निविदा को लेकर सांठ गांठ की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार सभी निविदा की रकम लगभग 2 से 4 करोड़ तक बताई जा रही है।

आपको बता दे कि नगर पालिका परिषद चांपा में निर्माण कार्य सहित अन्य कार्यों के लिए निविदा फॉर्म खरीदने के लिए रसीद कटवाने का दिनांक 15 जनवरी 2026 निर्धारित था। जहां निर्धारित समय पर रसीदें भी काटी गई। रसीद काटने के बाद फॉर्म खरीदने का समय भी निर्धारित रहता है। जिस पर नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी और संबंधित लोगों ने मिलकर बंद कमरे में आपसी सहमति से निविदा की बातें कर ली। जो कि पूर्ण रूप से अवैध माना जा सकता है क्योंकि निविदा का सभी कार्य स्वतंत्र स्थान पर किया जाना होता है? विश्वस्त सूत्रों के अनुसार निविदा फॉर्म रसीद कटने के बाद तुरंत लिया जाना होता है लेकिन निविदा फॉर्म भी 16 जनवरी 2026 की जगह 19 जनवरी 2026 को पुराने दिनांक पर दिया गया। जिस पर अधिकारी और कर्मचारियों ने फॉर्म खरीदने से पहले ही सारे दस्तावेजों के सत्यापन और जांच की बात कही। चूंकि निविदा फॉर्म खरीदने के बाद ही सत्यापन, जांच और पात्र अपात्र की जानकारी स्पष्ट की जाती है।

बिना कैमरे वाले बंद कमरे में निविदा की बातें क्यों?

एक तरफ सरकार निविदा को लेकर काफी सतर्कता बरतती नजर आती है। वहीं सरकारी नुमाइंदे ही सरकार की योजना को पलीता पहनाते नजर आ रहे है। नगर पालिका परिषद चांपा की बातें करे तो निविदा खुले स्थानों पर आमंत्रित की जानी चाहिए लेकिन नपा चांपा के अधिकारी कर्मचारियों और निविदा से संबंधित अन्य लोगों की गोपनीयता भंग ना हो जाए इसलिए बिना कैमरे वाले बंद कमरे में निविदा की सारी प्रक्रिया के निष्पादन किया गया। सूत्रों के अनुसार निविदा को लेकर काफी माहौल गर्म रहा। वहीं अधिकारियों और कर्मचारियों ने निविदा को लेकर सारी हदें पार कर दी। वहीं दबे रूप में जानकारी यह भी मिल रही कि निविदा किसे मिलनी चाहिए और किसे नहीं मिलनी, निविदा किसे मिलेगा, किसे नहीं मिलेगा, निविदा का काम कौन कौन करेगा जैसी बाते भी की गई।

क्या जांच होगी? 

सूत्रों के अनुसार निविदा में सम्मिलित अधिकारी कर्मचारियों और जिम्मेदार लोगों के साथ उपस्थित ठेकेदारों की निविदा को लेकर उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। जिससे निविदा में सम्मिलित होने वाले कुछ ऐसे लोगों को राहत मिल सके जो अन्य स्थानों से निविदा में सम्मिलित होना चाहते है।

कहीं कमिशन का लालच तो नहीं?

सूत्रों के अनुसार बंद कमरे में निविदा की बातें किसी को हजम नहीं हो पा रही है। आखिर बंद कमरे में निविदा से संबंधित क्या बाते हो रही थी। क्या निविदा में कमिशन का खेल होता है? अगर होता है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? सार्वजनिक होने से भारत के किसी भी कोने से ठेकेदार कमिशन सहित निविदा में भाग ले सकते है?

फिलहाल नगर पालिका परिषद चांपा में निविदा को लेकर बड़ा खेल जारी है? जिसमें नपा चांपा के अधिकारी कर्मचारी सहित बाबुओं की संलिप्तता हो सकती है? अब देखना यह है कि जिस नपा चांपा के जानकारी के लिए सीएमओ जिले के कलेक्टर के पास भेजते है, क्या जिले के कलेक्टर उस नपा चांपा की उच्च स्तरीय जांच करा पाएंगे?

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