
वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा नगर विकास का गुणगान गया जाता है। लेकिन व्यवस्था उसके उल्टे नजर आती है। एक ओर नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी निविदा के नाम पर लाखों का झोल करते नजर आ रहे है। जिसका ताजा उदाहरण साफ सफाई प्लेसमेंट कर्मचारियों का 2 से 3 महीने के भुगतान नहीं होना देखा गया है। वहीं साफ सफाई का साल का निविदा लगभग डेढ़ से 2 करोड़ के बीच पहुंचता है। उसके बाद भी नगर की साफ सफाई जस की तस है। जिससे यह प्रतीत होता है कि नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ निविदा ओर उससे अदृश्य रूप से मिलने वाले कमिशन की लालच में नगर को और गंदगी से पाटने की कोशिश कर रहे है। साफ सफाई होती तो है लेकिन उससे अधिक गंदगी नजर आती है।
ठेकेदार द्वारा की गई गंदगी साफ कौन करेगा?
वार्ड नंबर 20 में डॉक्टर चंद्रा क्लीनिक के सामने भालेराव स्टेडियम में बने दुकानों के पास ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य किया गया। लेकिन उससे निर्मित गंदगी को हटाया नहीं गया। वहीं 2 से 3 महीने बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। वार्डवासी सुभाष शर्मा के द्वारा नगर पालिका में पत्राचार भी किया गया लेकिन उसका जवाब देना तो दूर उसका निराकरण करना भी मुनासिब नहीं समझा गया। उस स्थान पर लगातार गंदगी का आलम है लेकिन नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी सिर्फ निविदा के निराकरण में लगे हुए है। नगर का विकास हो या ना हो निविदा से होने वाले विकास के लिए तत्पर नजर आते है।
फिलहाल वार्डवासी द्वारा दिया गया आवेदन कचरे के डिब्बे में डाल दिया गया होगा, साथ ही शिकायत का वह पत्र नगर पालिका चांपा के किसी कोने में धूल खा रहा होगा। शायद अब इसके लिए भी वार्डवासी या शिकायतकर्ता को जिले के कलेक्टर के पास जाने हिदायत दी जा सकती है, क्योंकि सीएमओ साहब के पास इतने काम है कि उनके पास नगर के छोटे छोटे कामों को देखने की फुर्सत भी शायद होगी?

