वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा के अंतर्गत आने वाले राजस्व विभाग की माने तो कई ऐसे दस्तावेज है जो अपने आप लापता हो चुके है। और तो और काम का बोझ इतना हो गया है कि दस्तावेज ढूंढने के लिए कम से कम 100 से 200 साल लग सकते है। आम जनता या पत्रकारों की माने तो दस्तावेज ढूंढने के लिए कर्मचारियों को वही 100 या 200 साल की जरूरत पड़ने लगती है लेकिन जब जिले के कलेक्टर या सचिव स्तर के अधिकारियों को इसकी जरूरत पड़ती है साथ ही विधानसभा सत्र में तो कहना ही कुछ और रहता है। सब मामलों में नगर पालिका के कर्मचारी जमीन खोदकर या आसमान से ढूंढकर तत्काल दस्तावेज उपलब्ध करते है, दस्तावेज नहीं मिलने की स्थिति में बनवा कर भी दे देते है। अचानक ही दस्तावेज ढूंढने में लगने वाले 100 या 200 साल वाले कर्मचारी चन्द पल में ही ढूंढ लाते है।
आपको बता दें कि नगर पालिक परिषद चांपा के अंतर्गत व्यवसायिक दुकानों का आबंटन किया गया है। कुछ दुकानों की बिक्री की गई है वही कुछ दुकान खाली पड़े हुए है। नगर पालिका परिषद चांपा राजस्व विभाग की माने तो उनका एग्रीमेंट पेपर मिल नहीं रहा या ऐसा माना जा सकता है कि गायब कर दिया गया है। पत्रकार द्वारा पूछे जाने पर किसी भी दुकान का एग्रीमेंट पेपर और नियमावली नगर पालिका परिषद चांपा के राजस्व विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। सीधे तौर पर यह माना जा सकता है कि आपसी सांठ गांठ के चलते कमिशन या अतिरिक्त रुपए देकर एग्रीमेंट पेपर और नियमावली गायब करवा दिया गया होगा? क्या जिले के कलेक्टर के संरक्षण में यह सब मामला चल रहा है? अगर ऐसा मामला है तो आने वाले समय में नगर को भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारियों से कोई नहीं बचा पाएगा? क्या दुकानों के सम्बंधित फाइल राजस्व विभाग गायब कर चुका है?
बहरहाल नगर पालिका के अंतर्गत आने वाले दुकानों की एग्रीमेंट पेपर और संबंधित दस्तावेज नहीं है तो स्थिति बद से बदतर की मानी जा सकती है। इससे साफ स्पष्ट लग रहा कि नपा चांपा में भ्रष्टाचार का खेल गजब का चल रहा है। क्या जिले के कलेक्टर को इसकी जानकारी है, अगर नहीं तो चांपा नगर की दुर्दशा होते समय नहीं लगेगा।

