खराब गार्डन और टूटे झूले का उपयोग करवा रहे नगर पालिका के अधिकारी कर्मचारी, मजबूरी में उपयोग कर रहे नगर के जनता, बूढ़े, बच्चे और महिलाएं….

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वासु सोनी चांपा। वैसे तो चांपा नगर में धन धान्य से भरपूर है, लेकिन कुछ पल के सुकून के लिए नगर पालिका परिषद द्वारा बनाए गए गार्डन में घूमने जरूर जाते है। वहीं गार्डन की खराब स्थिति और टूटे झूले से नगर की जनता का मन खराब हो जाता है। मजबूरी में वे सभी उसका उपयोग कर काम चला रहे है।

आपको बता दें कि नगर पालिका परिषद चांपा द्वारा गौरव पथ रोड में गार्डन का निर्माण किया गया है लेकिन उस गार्डन को उपयोग करने से भी डर लगने लगा है। कहते है कि आम का रस खत्म हो जाने के बाद आम का कोई औचित्य नहीं रह जाता। ठीक उसी प्रकार गार्डन और उससे मिलने वाली राशि ठेकेदार, अधिकारी-कर्मचारी और मेंटेनेंस करने वालों ने खत्म कर दी है। अब उस गार्डन की देखरेख और उस पर होने वाले खर्चे की जानकारी भी किसी को नहीं है। मजबूरी में आम जनता बिना घास वाले गार्डन, टूटे झूले पर अपने बच्चों को झुलाते दिख जाते है।

नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी सिर्फ अपने वेतन और ठेकेदारों से मिलने वाले कमीशन को ही अपना दायित्व मानते है। वर्तमान में नगर पालिका में सिर्फ अधिकारी राजा और ठेकेदारी राज हावी हो चुका है तो दूसरी ओर कर्मचारी भी पीछे नहीं है। नियमों कानून की किताब लेकर वे भी कर्मचारी राज बनाने अछूते नहीं। साफ शब्दों में कह सकते है कि नगर पालिका परिषद चांपा में काम करने वालों से टक्कर लेने से पहले पूरी तैयारी रखे वरना सिर्फ हाथ मलते रह जाएंगे?

कौन खा जा रहा मेंटेनेंस का पैसा, या शासन ही नहीं करवा पा रही मेंटेनेंस

नगर की जनता अब यह जानना चाह रही है कि आखिर गार्डन की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है? साथ ही मेंटेनेंस की राशि और कमीशन आखिर कौन खा जा रहा है, क्या जिले के कलेक्टर को इसकी जानकारी है? संभवतः मामला ठंडे बस्ते में जाने की तैयारी में होगा?

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