वासु सोनी चांपा। इन दिनों चांपा नगर में उल्टी गंगा बह रही है। एक ओर अधिकारी कहते फिरते हैं कि जनता विकास मांग रही है तो वहीं दूसरी ओर अधिकारी कहते है हम अपनी मर्जी से काम करेंगे। अब अधिकारी और कर्मचारियों को वेतन शासन की ओर से प्राप्त हो रहा है तो जनता से क्या लेना देना? ऐसा मानना है जांजगीर चांपा जिले के अधिकारी कर्मचारियों का?
आपको बता दें कि नगरपालिका परिषद चांपा में अधिकारी और बाबूराज इस कदर हावी हो गया है कि इन्हें सिर्फ कमीशन ही नजर आ रहा है। हनुमान धारा विकास कार्य के लिए करोड़ों की राशि प्रस्तावित हुईं है। जहां नगर पालिका सीएमओ रामसंजीवन सोनवानी इसके दस्तावेजों को अपनी घर की संपत्ति समझ किसी को नहीं देना चाह रहे है? वहीं नगर पालिका परिषद चांपा से कलेक्टर कार्यालय के लिए गए हनुमान धारा विकास की फाइल में भ्रष्टाचार करने के लिए 6 माह बीत जाने के बाद भी कलेक्टर कार्यालय से नगर पालिका परिषद चांपा अभी तक नहीं आया है? वहीं बिना दस्तावेज करोड़ो को लागत से होने वाले विकास कार्य को कलेक्टर कार्यालय का आखिर कौन अधिकारी है जो दबाए बैठा है? आखिर कलेक्टर कार्यालय का कौन सा अधिकारी है जिसे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय से संरक्षण प्राप्त है? जिसके चलते करोड़ों का बंदरबाट और हनुमान धारा में विकास को विनाश करने भरपूर तैयारी जारी है?
कमीशन नहीं मिल जाएगा तब तक फाइल नहीं देंगे?
नगर पालिका परिषद चांपा और जिले के कलेक्टर के बीच सांठ गांठ नगर को जनता अब समझ रही है? नगर के विकास कार्य के नाम पर करोड़ों कमीशन जेब में डालने को तैयारी पूरी है? किसी भी विकास कार्य के लिए दस्तावेज नहीं दिया जा रहा है? आखिर कितने करोड़ की कमीशन हजम करने की तैयारी है? वही हनुमान धारा सौंदर्यीकरण की फाइल दबा कर रखने अधिकारी और कर्मचारियों को कितन कमीशन ठेकेदार से मिल रहा है?
बिना दस्तावेज कार्य शुरू, कमीशन करोड़ों में तो नहीं?
सूचना के अधिकार आवेदन के जवाब में कलेक्टर कार्यालय दस्तावेज भेजने के बाद कलेक्टर कार्यालय के किस अधिकारी को हनुमान धारा विकास कार्य में काफी दिलचस्पी है? क्या कलेक्टर कार्यालय के अधिकारी हनुमान धारा को विनाश की ओर ले जा रहे है? आखिर दस्तावेज में क्या राज छुपा है? ठेकेदार और अधिकारियों की पोल ना खुल जाए, इसलिए दस्तावेज दबा दिया गया है?
बहरहाल हनुमान धारा में जिले के कलेक्टर कार्यालय के अधिकारियों और नगर पालिका परिषद चांपा की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है, जिसका उदाहरण बिना दस्तावेज शुरू कराए कार्य को देखकर लगाया जा सकता है? अधिकारी विकास को विनाश बनाने पूरी तैयारी में लग चुके हैं?

