
वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा अंतर्गत जितने भी मरम्मत और रिपेयरिंग कार्य किए जा रहे है, उनकी गुणवत्ता देखकर आम जनता के पैरों तले जमीन खिसक जा रही है, वही इसकी बात करने मात्र से ठेकेदार और उनके कर्मचारियों द्वारा यही कहा जा रहा है कि अधिकारी ही ऐसा काम करा रहे है जाओ जिसे बोलना है बोल दो, देख लेंगे?
आपको बता दें कि छोटे छोटे रिपेयरिंग कार्यों में 1 लाख से कम और अधिक राशि के मरम्मत और रिपेयरिंग कार्य के लिए निविदा निकाला जाता है। जिसमें ठेकेदारों को कार्य करना होता है जहां ठेकेदारों की सोच को 100 तोपों की सलामी जरूर दे सकते है? उनका मानना है कि अधिकारी और कर्मचारियों को भी इसमें कमीशन चाहिए, आखिर ठेकेदार को क्या मिलेगा?
नगर में चल रहे मरम्मत कार्य पूर्ण कर लिए गए है। जिसकी जांच करने नगर पालिका परिषद चांपा का कोई भी अधिकारी कर्मचारी नहीं पहुंचा है। वही अब भुगतान और कमीशन का खुला खेल चलेगा। नगर पालिका क्षेत्र में हो रहे गुणवत्ताहीन कार्य कराने नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारी ही जिम्मेदार हैं? बिना मौके पर पहुंचे बड़ी आसानी से बंद कमरे में बैठकर भुगतान और कमीशन तक पहुंच गए है। ठेकेदार अपनी मनमर्जी से गुणवत्ताहीन कार्य पूर्ण कराकर अब भुगतान के लिए लग चुके हैं? आखिर कमीशन सबको चाहिए, जांच करने कौन जाए? शायद जिले के साहब को भी देना पड़ता होगा? जितनी जल्दी कार्य, उतना जल्दी कमीशन आयेगा कि उम्मीद पर नगर विनाश की लीला शुरू हो चुकी है।

