
वासु सोनी चांपा। नगर के राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा आम जनता को धोखे में रखकर बड़े भू माफिया पर कार्रवाई करने सोचना पड़ रहा है कही नौकरी खतरे में ना आ जाए? इसलिए नगर के अन्य स्थानों पर छोटे छोटे शासकीय भूमि पर हुए कब्जे को तोड़कर बड़े भू माफिया को राहत प्रदान करने में लगी है?
आपको बता दें कि चांपा हनुमान धारा पर्यटन स्थल के आसपास कई एकड़ शासकीय भूमि स्थित है, जिसे भू माफिया द्वारा कब्जा कर लिया गया है? कब्जे के पहले भी बिहान खबर ने समाचार प्रकाशित किय था जिस पर ध्यान देना तो दूर शासकीय भूमि की जानकारी लेना भी मुनासिब नहीं समझा गया। वहीं नगर की जनता कह रही है कि हनुमान धारा शासकीय भूमि कब्जे में नगर के राजस्व अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा मिलीभगत कर कई करोड़ रुपए का वारा न्यारा किया जा रहा है।
प्रार्थी द्वारा शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं बल्कि पीएमओ शिकायत के भेजा फर्जी दस्तावेज…
प्रार्थी द्वारा हनुमान धारा शासकीय भूमि पर कब्जे की शिकायत और शासकीय भूमि कितनी है उसकी जानकारी मांगी गई थी, जो आज तक नहीं दी गई बल्कि कार्यालय में बैठे बैठे पटवारी सुधेश शांडिल्य, तहसीलदार प्रशांत पटेल और एसडीएम पवन कोसमा ने बिना जांच किए, बिना मौके पर गए, बिना प्रार्थी को बुलाए, अपने कार्यालय में बैठकर दस्तावेज बना लिया और कलेक्टर शिकायत शाखा को भेज दिया। वही कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने भी फर्जी दस्तावेज को सही मानकर बिना जांच किए, प्रधानमंत्री शिकायत पोर्टल में डाल दिया। जबकि पूरे मामले में नगर के अन्य व्यक्ति के द्वारा सीमांकन आवेदन लगाया गया था जिस पर चार से पांच लोगों की टीम मौके पर आई थी और पंचनामा दस्तावेज में शासकीय भूमि पर कब्जे की बात लिखी? लेकिन यह समझ नहीं आया कि पटवारी ने कितने की रिश्वत लेकर फर्जी दस्तावेज बनाया होगा? आखिर इसकी जांच कौन करेगा, आखिर कितने अधिकारी शासकीय भूमि को भू माफिया को बेचने में मदद कर रहे है?
हनुमान धारा शासकीय भूमि कब्जा में भू माफिया के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं?
अब नगर की जनता जानना चाह रही है कि हनुमान धारा में करोड़ों की शासकीय भूमि पर भू माफिया द्वारा कब्जा करने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? आखिर कितने की रिश्वत लेकर नगर के राजस्व अधिकारी और कर्मचारी चुप क्यों बैठे है? नगर के पटवारी सुधेश शांडिल्य, तहसीलदार प्रशांत पटेल और एसडीएम पवन कोसमा आखिर हनुमान धारा में कार्रवाई करने क्यों नहीं जाना चाह रहे है? आखिर ऐसी क्या बात है हनुमान धारा के शासकीय भूमि में जो कई लोगों की शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं करना चाह रहे है? क्यों हनुमान धारा की शासकीय भूमि के बारे में नगर की जनता से छुपाया जा रहा है?
बहरहाल चांपा नगर की जनता का मानना है कि पटवारी सुधेश शांडिल्य, तहसीलदार प्रशांत पटेल और एसडीएम पवन कोसमा सहित नगर के अधिकारी कर्मचारी शासकीय भूमि को लेकर भू माफियों से मिले हुए है? इसलिए शायद हनुमान धारा शासकीय भूमि कब्जे में कोई भी कार्रवाई नहीं की जा रही है? अब देखना यह है कि प्रार्थी और जनता को धोखे में रखने वाले नगर के इन अधिकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या इन्हें भी भारत रत्न जैसे सम्मान दिया जाएगा?

