वासु सोनी चांपा। शासकीय संस्थानों में अधिकारियों और पत्रकारों की मध्यस्थता कराने वाले कार्यालय को जनसंपर्क कार्यालय कहा जाता है। जहां पत्रकारों को अधिकारियों से मिलाने के लिए शासन की ओर से एक कर्मचारी नियुक्त किया जाता है जिसे जनसंपर्क अधिकारी कहा जाता है। साथ ही अनेक कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाती है।
आपको बता दें कि भारतीय रेलवे में भी पीआरओ (जनसंपर्क अधिकारी) की नियुक्ति की जाती है। साथ ही प्रचार सहायक सहित अन्य कर्मचारी भी नियुक्त किए जाते है। रेलवे के अधीन जनसंपर्क अधिकारी भी अलग अलग नियुक्त है लेकिन कौन जनसंपर्क अधिकारी क्या काम करते है किसी को पता नहीं है?
4 जुलाई की सुबह चांपा स्टेशन रेलवे के उच्च अधिकारियों का निरीक्षण था। जहां पूर्व में प्राप्त जानकारी के अनुसार अंबिकेश साहू जिसे पत्रकार पीआरओ समझते थे वह प्रचार सहायक निकला। जिसकी जानकारी पूर्व में की गई शिकायत के बाद रेलवे के द्वारा जारी पत्र से मिली। उनके द्वारा चांपा स्टेशन में पत्रकार से दुर्व्यवहार करते हुए डीआरएम से बात करने से मना कर दिया गया। जिससे क्षुब्ध पत्रकार ने रेलमंत्री को ट्वीट करते हुए शिकायत भी की। वहीं रेलवे बिलासपुर जोन के सीपीआरओ से इस संबंध में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने मोबाइल माध्यम में बताया कि उसकी जानकारी सीनियर डीसीएम देंगे वो सीपीआरओ के अधीन कर्मचारी नहीं हैं? जिससे साफ प्रतीत होता है कि सीनियर डीसीएम के नक्शे कदम पर चलने वाले प्रचार सहायक अंबिकेश साहू अपने आप को बिलासपुर जोन के सबसे उच्च अधिकारियों से भी ऊपर समझ रहे है।
डीआरएम ने क्या कहा…
जब इस मामले में बिलासपुर जोन के डीआरएम से पूछा गया कि पत्रकारों को अधिकारियों से बात करने से क्यों रोका जाता है तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा ये ऑफिशियल निरीक्षण रहता है जिसमें पत्रकारों से बात करने समय नहीं रहता। पत्रकारों से बात करने के लिए अलग से समय निकाला जाता है। लेकिन समझने वाली बात यह है कि आखिर निरीक्षण के समय पत्रकारों से दूरी क्यों बनाई जाती है? जब रेलवे बिलासपुर जोन के अधिकारियों का मन करे तो पत्रकारों से चर्चा करे वरना उनके प्रचार सहायक अंबिकेश साहू पत्रकारों को नीचा दिखाने आगे रहते हैं।

