
चांपा,
ट्रेन से गांजा तस्करी का मामला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं चांपा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नं.02 में पेड़ के नीचे लगभग 22 किलो गांजा तस्कर छोड़ भागे। चांपा आरपीएफ की कार्रवाई से लगभग 22 किलो गांजा जप्त कर कार्रवाई की गई है।

आपको बता दें कि गांजा तस्करों द्वारा गांजा की तस्करी करने का मामला सामने आता रहता है। गांजा तस्कर उड़ीसा से गांजा लेकर अन्य राज्यों में सप्लाई करते हैं। जिसके लिए सबसे बढ़िया साधन ट्रेन है लेकिन मुखबीर द्वारा सूचना पर आरपीएफ और जीआरपी द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में चांपा आरपीएफ की टीम साउथ बिहार ट्रेन से अपने क्षेत्र अंतर्गत दौरे पर निकले वहीं दूसरी ओर से हीराकुंड ट्रेन से शाम लगभग 06 बजे वापस आए। जिसमें सूचना मिली की हीराकुंड ट्रेन से गांजा तस्करों द्वारा गांजा ले जाया जा रहा है। हीराकुंड ट्रेन के चांपा स्टेशन पहुंचने पर एक बड़े कार्टून डिब्बे में 18 पैकेट में 22 किलो गांजा एक पेड़ के नीचे रखा गया था। जब हीराकुंड ट्रेन स्टेशन से निकली तब दो तस्करों ने डिब्बे को उठाकर ट्रेन में रखने की कोशिश की तभी आरपीएफ द्वारा पीछे से आवाज लगाने पर गांजा तस्कर गांजा छोड़ भाग निकले।

वर्चस्व की लड़ाई या कुछ और…


रेलवे में जीआरपी और आरपीएफ दोनों ही पुलिस मौजूद रहती है लेकिन चांपा स्टेशन में आखिर ये कैसी लड़ाई जिसके चलते स्टेशन के प्लेटफार्म नं.02 में लगभग 22 किलो गांजा 20 घंटे तक लावारिस स्थिति में पड़ी रही। लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। आखिरकार दूसरे दिन दोपहर 02 बजे के बाद आरपीएफ की टीम ने कार्टून डिब्बे से गांजा निकालकर तौलकर अपने कब्जे में लिया। फिलहाल पूरी कार्रवाई के दौरान जीआरपी का एक भी कर्मचारी उपस्थित नहीं था। जबकि गांजा तस्करों के लिए जीआरपी जिम्मेदार होता है। सूत्रों की मानें तो वर्चस्व की लड़ाई को लेकर जीआरपी और आरपीएफ आमने सामने है जिससे चलते यात्रियों को कभी ना कभी नुकसान उठाना पड़ सकता है।


बहरहाल जीआरपी और आरपीएफ की ये कैसी लड़ाई जिसके चलते 22 किलो गांजा 20 घंटे तक स्टेशन में लावारिस स्थिति में पड़ा रहा। वहीं अधिकारियों जब इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने उच्च अधिकारियों से बात करने का हवाला देकर मामले का पटाक्षेप कर दिया।




