कोई फर्क नहीं पड़ता…आखिर अधिकारियों की उचित जांच और कार्रवाई होती क्या है?
वासु सोनी चांपा। जिले में लगभग कई हजार उच्च और निम्न स्तर के कर्मचारी कार्य कर रहे है। विभाग भी कई हैं परन्तु आम जनता की शिकायत पर अधिकारी उचित जांच कर कार्रवाई करने की बात कहते है? अब ये उचित जांच और कार्रवाई करने का जो सिलसिला जिले में चल रहा है उसके मुताबिक आरटीआई और अन्य माध्यमों से जानकारी लेने पर जितने अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे है उससे अधिक शिकायत और उचित जांच सहित कार्रवाई के दस्तावेज विभागों के चक्कर काट रहे है। दस्तावेज की बात करें तो अधिकारी वही दस्तावेज देंगे जो देने लायक हो या नियमों की बात करें तो जिन्हें उन्हें देना होगा वो वही डेंग? वैसे भी कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि सभी एक ही थाली के चट्टे बट्टे है? नियम कानून से याद आया अगर किसी अधिकारी कर्मचारी से शिकायत हो तो एक शिकायत देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से पहले करें? क्योंकि लोकल स्तर पर शिकायत करने से सिर्फ उचित जांच और कार्रवाई का आश्वासन जिंदगी भर मिलता रहता है या फिर यह कहें कि शिकायत लेकर प्रार्थी सीधे न्यायालय की शरण में चला जाए क्योंकि कोई फर्क नहीं पड़ता? ना ही कोई शासकीय सेवक उचित जांच के बारे में जनता को बता पाएंगे और ना ही कोई कार्रवाई की बात सार्वजनिक की जाएगी, क्योंकि कोई फर्क नहीं पड़ता?
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