असम की हिमंता सरकार ने एनआरसी को लेकर बड़ा फैसला लिया है। हिमंता सरकार ने एनआरसी के लिए आवेदन को अनिवार्य कर दिया है। बिना एनआरसी आवेदन के आधार कार्ड नहीं बनेगा। बांग्लादेशी घुसपैठ को देखते हुए राज्य सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है और एप्लिकेशन वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को मजबूत किया है।
राज्य की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने कहा कि अगर एप्लिकेंट या उसके परिवार ने एनआरसी के लिए आवेदन नहीं किया है तो आधार हासिल करने के लिए सभी आवेदन खारिज कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह फैसला कैबिनेट की मीटिंग में किया गया है। जब उथल-पुथल बांग्लादेश के लोग घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “असम पुलिस, त्रिपुरा पुलिस और बीएसएफ ने पिछले दो महीनों में घुसपैठ की कई कोशिशों को नाकाम किया है। यही वजह है कि बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ हमारे लिए चिंता की बात है। हमें अपने सिस्टम को मजबूत करना होगा और इसलिए आधार मकेनिज्म को टफ बनाया गया है। कैबिनेट मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार में जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट आधार आवेदकों के वेरिफिकेशन का काम देखेगी और हर जिले में एडिश्नल डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर इस काम के लिए जिम्मेदार होंगे।
आखिरी बार एनआरसी 31 अगस्त, 2019 को जारी की गई थी, जिसमें 19,06,657 लोगों को बाहर रखा गया था। 3,30,27,661 आवेदकों में से कुल 3,11,21,004 नाम शामिल किए गए थे।
आबादी से ज्यादा आधार एप्लिकेशन
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दावा किया था राज्य के चार जिलों में आधार आवेदक आबादी से ज्यादा हो गए हैं, जिसपर उन्होंने फर्जीवाड़े की संभावना जताई थी। इस मामले के बाद उन्होंने तब कहा था कि इसलिए राज्य सरकार ने फैसला किया है कि आधार एप्लिकेशन के साथ एनआरसी एप्लिकेशन रिसिप्ट नंबर भी देना होगा। मुख्यमंत्री सरमा ने बताया था कि ढुबरी समेत ऐसे चार जिले हैं जहां आबादी से ज्यादा आधार एप्लिकेशन आए हैं। उन्होंने कहा था कि इनमें बारपेटा 103.74 फीसदी, ढुबरी 103 फीसदी, और दोनों मोरिगांव और नगांव में 101 फीसदी एप्लिकेशन आए हैं।



