महाकुंभ 2025 : रहस्यमयी है अखाड़ों की परंपरा और उनके नाम, जानिए कैसे चुना जाता है सेनापति

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प्रयागराज,

अखाड़ों की परंपरा, प्रतिष्ठा और नाम किसी रहस्य से कम नहीं है। सदियों से चली आ रही उनकी परम्परा का निर्वहन आज भी यानी 21 वीं सदी में भी ये अखाड़े कर रहे है। उसी में शामिल है सेनापति का पद जिसके पास उसकी खुदकी बटालियन यानी साधुओं की फौज होती है। लेकिन सेनापति का चुनाव बहुत ही चुनौतीपूर्ण होता है।
सेनापति बनने के लिए एक संत को 27 महीने कड़े परिश्रम से गुजरना होता है।

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