दशकों का इंतजार होगा खत्म; दिल्ली से कश्मीर के बीच चलेंगी 5 वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी से लैस ट्रेनें, जानें क्या होंगी खासियत?

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जल्द ही भारतीय रेलवे एक बड़ी योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी में है कश्मीर जाने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी भारतीय रेलवे जल्द ही देश की राजधानी नई दिल्ली से कश्मीर तक 5 ट्रेनें चलाने की योजना बना रहा है. रेलवे अधिकारियों ने कहा कि यह ट्रेनें अगले साल शुरू हो सकती हैं, जो हिमालय से होकर कश्मीर क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ेगी. मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली से कश्मीर को जोड़ने के लिए लगभग तीन दशक का इंतजार खत्म हो जाएगा.

इंडियन एक्सप्रेस ने रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से कहा कि ये स्लीपर एसी ट्रेनें होंगी, जो कोच में हीटिंग सुविधाओं से लैस होंगी, और जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा को देखते हुए इन ट्रेनों की सुरक्षा जांच बढ़ाई जाएगी. अधिकारी ने बताया “इन 5 रेक का निर्माण पूरा हो चुका है और ट्रेनें सफर के लिए तैयार हैं. इसे अगले साल के पहले महीने में लॉन्च किया जा सकता है. हर गाड़ी में 22 कोच होंगे,”

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

अधिकारी ने कहा कि कोच के पहिये और इंजन के सामने के शीशे को बर्फ जमने से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है. ऑन-बोर्ड हीटिंग और जीरो डिग्री से कम तापमान में बर्फ के जमाव को हटाने की भी सुविधा होगी.“ट्रेन की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है. कोचों को प्लेटफॉर्म से निकलने से पहले सैनिटाइज किया जाएगा. श्रीनगर जाने वाले यात्रियों को Airpot पर सुरक्षा जांच की तरह एक खास सुरक्षा जांच से गुजरना होगा.”

कश्मीर को कन्याकुमारी से जोड़ने वाली परियोजना तैयार

केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में लोकसभा में कहा कि अगले चार महीनों के अंदर कश्मीर को कन्याकुमारी से जोड़ने वाली एक परियोजना तैयार है और इस मार्ग पर ट्रेनें चलने लगेंगी, जो भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, इस लाइन के खुलने के साथ ही सरकार का दूसरा लक्ष्य है.

क्या है उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक परियोजना

रेलवे सुरक्षा आयोग की अनुमति इन ट्रेनों को चलाने की अनुमति देगा. फिलहाल, उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक परियोजना के कटरा से रियासी खंड (17 किमी) पर काम चल रहा है और सीआरएस को साइट का निरीक्षण करना है. गौरतलब है कि यूएसबीआरएल (Kashmir Line) नामक रेलवे परियोजना को 1994-95 में मंजूरी दी गई थी, लेकिन पिछले 25 वर्षों में भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक घटनाओं की वजह से यह आगे नहीं बढ़ सकी. अब इसकी लागत कई गुना बढ़ गई है और वर्तमान अनुमान 37,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें देश का प्रसिद्ध चिनाब पुल भी शामिल है, जो 359 मीटर ऊंचा है.

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