
जशपुर,
कल चुनाव आयोग ने बैठकर निकाय और पंचायत चुनाव की घोषणा कर दी, और तैयारियों में ऐसा फलसफ़ा शामिल किया कि कुछ कहने लगे कि वक्त ही नही मिल पा रहा।
निकाय चुनाव को लेकर जिले के बगीचा नगर पञ्चायत में भाजपा की सुगबुगाहट 15 दिन पहले ही शुरू हो गयी थी, और यह जो सुगबुगाहट थी, वह थी टिकट को लेकर !
टिकट में जहां आपाधापी शुरू हुई है, वहीं यह भी बात है कि टिकट देने में जो स्थानीय शीर्षस्थ नेताओं की कोशिशें है, उसमे अपने मोहरे फिट करने से ज्यादा दिखाई नही दे रहा, भले यहा लोकल कोर कमिटी ही कि बात क्यों न हो।
अब इन सब के बीच सवाल यह भी है कि जीतेगा तो कौन फटाका फोड़ेगा, और हार हुई तो जिम्मेदारी कौन लेगा ! लोगों की माने तो सरकार आने के बाद टिकटों की होड़ मची है, लाइन भी लगी है, पर क्या वो चेहरे जन अपेक्षाओं को पूरा करते दिखते हैं, मतलब कि जनता ये माने कि पार्टी ने हमे अच्छा कंडिडेट दिया है, इसकी पूर्ति कितनी टिकट से दिखेगी, और जीत का पैमाना भी यही होगा, जो यह तय करेगा कि ये कंडिडेट जन अपेक्षाओं के अनुरूप है, और जनता का उसकी तरफ झुकाव स्प्ष्ट है।
हालांकि अभी टिकट की घोषणा नही हुई है, पर 22 जनवरी से नामांकन भी प्रारंभ हो जाएगा ! पर टिकट कैसा होगा, किनको दिया जा रहा, और किसकी सिफारिश पर..! और यह मोहरा किस नेता के हिस्से का है, क्या ये जीत पायेगा, जो अहम सवाल यहां पर है, वही दूसरी तरफ जनता भी इस टिकट के खेल को नजदीक से देख तो रही है, पर कह नही रही।
क्योंकि शायद जनता को ही इंतजार है, कि अपेक्षाओं वाला कंडिडेट मेरे दरवाजे पहुंचेगा, या गोटी के मोहरो वाला, जो तमाशे के बाद एक डब्बे में बंद कर रख दिया जाएगा।
लेकिन टिकट देने दिलाने वाले भी हार जीत का जिम्मा कितना लेंगे, यह जरूर भाजपा के अंदर सवाल होगा हि, क्योंकि सरकार है, तो टिकट की आपाधापी भी, और मोहरो को बिठाने का खेल भी!


