चांपा,
नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा होते ही सभी दावेदार अपनी दावेदारी को लेकर भाग दौड़ में लगे हुए है। वहीं नगर में कितने कार्य सही ढंग से हुए हैं और किस पार्टी के प्रतिनिधि के द्वारा कराए गए है। इसकी जानकारी के बाद ही जनता अपने वोट का उपयोग करें। नगर में बीते कई वर्षों में यही देखने के मिला है कि जिस भी पार्टी का प्रतिनिधि नगर पालिका परिषद चांपा में बनता है वह सिर्फ गिने चुने कार्यों को करवाकर अपने पांच साल के दायित्वों का निर्वहन कर लेता है और अंत में जनता के द्वारा बताए गए कार्यों को छोड़ देता है। जिससे यही प्रतीत होता है कि किसी भी पार्टी का प्रतिनिधि बने, वह सिर्फ अपनी जेब भरने की सोचता रहता है।
आपको बता दें कि पिछले कई सालों से नगर पालिका परिषद के कार्यों की ओर देखे तो नगर में विकास का काम कम और बर्बादी का काम ज्यादा से ज्यादा हुआ है। वहीं जिस भी पार्टी का नेता पालिका में प्रतिनिधि बनता है, वह सबसे पहले अपनी जेब भरने की सोचता है। जिसके चलते नगर के विकास में अवरोध उत्पन्न होता रहता है। विकास कार्य की ओर देखें तो कई विकास कार्य ऐसे हैं जो कुछ ही वर्षों में अपनी लोकप्रियता खो बैठा है। वहीं अपनी दूर्दशा पर आंसू भी बहाता नजर आ रहा है।
नगर की जनता अपने वोट का उपयोग कर एक अच्छे और नगर विकास की ओर ध्यान देने वाला जनप्रतिनिधि चुनते हैं लेकिन चुने जाने के बाद प्रतिनिधि नगर विकास की ओर कम और अपने विकास की ओर ज्यादा ध्यान देता है। जिसके चलते नगर का विकास दम तोड़ता नजर आता है। नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो चुका है। चुनाव लड़ने योग्य उम्मीदवार अपनी तैयारियों में लग चुके है। 15 फरवरी को पुनः योग्य प्रत्याशी नगर की जनता को मिल जायेगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर की जनता किसे अपना पार्षद और अध्यक्ष बनाना पसंद करती है। वहीं पुराने कंधो को लाभ मिलेगा या नए कंधो पर बड़ी जवाबदारी होगी।
योग्य प्रत्याशी का चयन करने नगर की जनता नगर में कई तरह की चर्चा शुरू हो चुकी है। वहीं इस बार नए उम्मीदवारों को अपना प्रतिनिधि बनाने का कवायद शुरू है। क्या इस बार विश्वसनीय पार्टी के उम्मीदवारों को जनता का समर्थन मिल पायेगा या फिर नए उम्मीदवारों पर जनता की निगाहें रूकेगी। जनता की माने तो पार्टी विशेष प्रतिनिधियों पर लोगों का मोह भंग हो चुका है वहीं किसी नए चेहरे पर लोगों की नजरे टिकी हुई है लेकिन क्या पार्टी नया चेहरा ला पायेगी या फिर पुराने चेहरे को ही मौका मिलेगा।

