सस्ते होंगे एप्पल, शाओमी के स्मार्टफोन…

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देश में मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने कुछ अहम फैसले लिए हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार, 1 फरवरी को संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2025-26 में स्मार्टफोन के महत्वपूर्ण सब-पार्ट्स पर आयात शुल्क खत्म करने की घोषणा की.

किन चीजों पर मिलेगी छूट?

सरकार ने मोबाइल फोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली, कैमरा मॉड्यूल, कनेक्टर्स, वायर्ड हेडसेट, माइक्रोफोन, रिसीवर, यूएसबी केबल और फिंगरप्रिंट स्कैनर के निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल पर आयात शुल्क खत्म कर दिया है. पहले इन चीजों पर 2.5% कस्टम ड्यूटी लगती थी, जिसे अब हटा दिया गया है.

भारत में मोबाइल निर्माण को मिलेगा फायदा (Union Budget 2025-26)

इस फैसले से भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ेगा और एप्पल, शाओमी जैसी बड़ी कंपनियां स्थानीय स्तर पर अधिक निर्माण करने के लिए प्रेरित होंगी. अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव के बीच यह कदम भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए एक बेहतर विकल्प बना सकता है.

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है. पिछले छह वर्षों में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन दोगुना होकर 2024 में 115 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. शोध कंपनी काउंटरपॉइंट के अनुसार, 2024 में एप्पल ने 23% बाजार हिस्सेदारी के साथ भारत के स्मार्टफोन बाजार में बढ़त बनाई, जबकि सैमसंग 22% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा.

अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों पर भी असर (Union Budget 2025-26)

बजट में इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले (IFPD) पर कस्टम ड्यूटी 10% से बढ़ाकर 20% कर दी गई है, जिससे भारत में इनका निर्माण बढ़ेगा.

वहीं, IFPD बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘ओपन सेल’ पर शुल्क 15% से घटाकर 5% कर दिया गया है. इसके अलावा, एलईडी और एलसीडी टीवी के निर्माण में काम आने वाले कुछ घटकों पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह हटा दी गई है.

इसके अलावा, कैरियर ग्रेड ईथरनेट स्विच पर आयात शुल्क 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है, जिससे उद्योग में संतुलन बना रहेगा.

पिछले साल सरकार ने मोबाइल फोन, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली (PCBA) और मोबाइल चार्जर पर आयात शुल्क 20% से घटाकर 15% करने की घोषणा की थी.

मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों पर आयात शुल्क में बदलाव से भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने में मदद मिलेगी. यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को और मजबूती देगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और भारत तकनीकी विनिर्माण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा.

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