
पिछले कुछ दिनों में देश भर में दहेज उत्पीड़न कानून पर बहुत चर्चा हुई है. सुप्रीम कोर्ट से लेकर कई उच्च न्यायालयों ने इस कानून के बेजा प्रयोग पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह कानून महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने के बजाय पुरुषों के उत्पीड़न का हथियार बन जाता है. ऐसा नहीं होना चाहिए था. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दहेज उत्पीड़न कानून के कुछ प्रावधानों के खिलाफ एक जनहित याचिका पहुंची, जिसे अदालत ने 2 मिनट के अंदर खारिज कर दिया. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के.वी. चंद्रन की बेंच ने कहा कि आप इस मामले में संसद में जाएं क्योंकि संसद का काम है किसी भी कानून को बनाना और उसे खत्म करना संसद का काम है.


