शासकीय सेवक हैं हम, जनता से कोई लेना देना नहीं, चाहे कही भी शिकायत हो, पीएमओ शिकायत का कोई असर नहीं… कोई ईमानदार अधिकारी राज्य या देश में हो तो जांच करवाए… भ्रष्टाचार देखनी हो तो नगर पालिका परिषद जरूर पहुंचे…क्योंकि जानकारी तो शायद ही मिलेगी?

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चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा के कर्मचारियों के हाल कुछ ऐसा है कि जनता उनके लिए जरूरी नहीं बल्कि रुपया उनके लिए जरूरी है? नगर पालिका परिषद चांपा के कर्मचारियों का हाल किसी से छुपा नहीं है फिर भी जिले के उच्च अधिकारी और देश के अधिकारियों को कोई मतलब नहीं है। कोई शिकायत भी करे तो कर्मचारियों पर कार्रवाई तो दूर उन्हें प्रमोशन और एक अच्छी रिटायरमेंट प्रदान की जाती है! भले ही जनता सिर्फ कार्यालय के चक्कर काटती रहे। आखिरकार अधिकारी है हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता कि तर्ज पर अधिकारी तो अधिकारी कर्मचारी भी मजे में है। जिले सहित देश के बड़े अधिकारी इसका जायजा लेना तो दूर जनता की शिकायत का कोई उचित जवाब या कार्रवाई भी नहीं कर पाते। उन्हें सिर्फ नोटो की हरियाली नजर आती है। वहीं दूसरी ओर अपने कर्मचारियों को बचाने एड़ी चोटी की जोर लगाते रहते है। जनता के लिए बने अधिकारी कर्मचारी सिर्फ यही कहते फिरते है कि जनता उनके पैर की धूल है। हमारे बिना जनता कुछ नहीं कर सकती। इसी तरीके को आजमाते हुए अधिकारी और कर्मचारी जनता के शोषण करते नजर आते है। नगर पालिका परिषद चांपा में सूचना अधिकारी की जानकारी देना कर्मचारी चाहते ही नहीं वे इतने भ्रष्ट हो चुके है कि वे प्रार्थी को जानकारी उपलब्ध नहीं कराते, बल्कि वो जानकारी उपलब्ध कराते है जिसमें कोई भ्रष्टाचार ना हुआ हो। नगर पालिका चांपा के कर्मचारियों को अपने वेतन से ही मतलब है बाकी समय वे आराम करते नजर आते है। उच्च अधिकारी या देश के अधिकारी जायजा ले तो शायद उन्हें पता चल जाए कि नगर पालिक परिषद के कर्मचारी को अधिकारी के रहने या नहीं रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता। फिलहाल शासकीय नौकरी मिलने के बाद अधिकारी और कर्मचारियों को जनता हमेशा मूर्ख ही नजर आती है। जिसका उदाहरण नगर पालिका परिषद चांपा में आसानी से देखा जा सकता है।

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