
वासु सोनी चांपा। एक ओर चांपा स्टेशन मॉडल बनने जा रहा है तो दूसरी ओर पार्किंग वाले लड़कों की गुंडागर्दी चरम पर है। वही आरपीएफ और जीआरपी के नाक के नीचे पार्किंग वाले स्टेशन में खड़ी बाइक में ताला लगा रहे है। ठेकेदारी प्रथा के आगे भारत की जनता नतमस्तक है। उसी तर्ज पर चांपा रेलवे स्टेशन के पूरे क्षेत्र को रेलवे द्वारा पार्किंग ठेका में दिया गया है। जिसमें रेलवे परिसर में पार्किंग ठेकेदार द्वारा नो पार्किंग का बोर्ड लगाया गया है। लेकिन किस प्रकार का नियम है इसका बोर्ड कही भी नहीं लगाया गया है। ठेकेदार और उनके कर्मचारियों का कहना है कि रेलवे परिसर में गाड़ी खड़ा नहीं करना है। वहीं किसी से बात भी नहीं करवाना है सिर्फ पार्किंग में जाकर शुल्क जमा करना है। तभी बाइक में लगा ताला खुलेगा। आम जनता को बिना नियमों को बताए या रेलवे द्वारा दिए गए ठेका नियमों को बिना चस्पा किए किस प्रकार की वसूली हो रही है, ये समझ से परे है। क्या बिना नियमों के बोर्ड लगाए रेलवे ठेकेदार के माध्यम से अवैध वसूली करवा रहा है या फिर ठेकेदार खुद ही बाहर से कर्मचारी लाकर अवैध वसूली करवा रहा है? हालांकि ठेके पर रेलवे पार्किंग चलाना कोई गुनाह नहीं है लेकिन पार्किंग में असामाजिक लोगों को रखना गुनाह की श्रेणी में आता है।
नियमों के बोर्ड क्यों नहीं लगा रहा ठेकेदार
वैसे तो रेलवे अपने नियमों को लेकर काफी सख्त रहता है लेकिन नियमों को आखिर आम जनता को बताएगा कौन, ये सबसे बड़ी समस्या है। चांपा रेलवे स्टेशन में पार्किंग ठेके पर संचालित है लेकिन पार्किंग के कर्मचारियों द्वारा परिसर में खड़ी बाइक में कुछ समय बाद ताला लगाया जा रहा है, जिसके चलते लोगों में भय व्याप्त है। वही कर्मचारियों से पूछने पर वे पार्किंग में जाकर बात करने कहते है। साथ ही अभद्र व्यवहार भी करते नजर आते है।
रेलवे ने पार्किंग ठेका दिया या अभद्र व्यवहार का?
चांपा स्टेशन परिसर में कुछ दिनों से पार्किंग के कर्मचारियों द्वारा लोगों से अभद्र व्यवहार करते नजर आ रहे है। वही कुछ लोगों से कहते सुना गया कि रेलवे द्वारा इनको यह ठेका दिया गया होगा? आखिर रेलवे की ऐसी क्या मजबूरी है जो उन्हें पार्किंग की जगह अभद्र व्यवहार करने वाले कर्मचारियों को रखना पड़ा।
फिलहाल स्टेशन परिसर में यात्रियों और आम जनता को परेशान करने का ठेका मिल गया है। अब देखना यह है कि चांपा रेलवे स्टेशन पार्किंग ठेकेदार अपने कर्मचारियों का व्यवहार बदलता है या रेलवे विभाग ठेकेदार?


