
चांपा। कहते हैं कि हालाहल विषपान करने वाले देवादिदेव भगवान शंकर की दाह मिटाने भगवान धनवंतरी ने ही अमृत प्रदान किया था।
दीपावली के पावन अवसर पर श्रीरामकृष्ण औषधालय हटरी बाजार चांपा में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी धन्वंतरि जयंती समारोह एवं लक्ष्मी पूजन विधि-विधान से किया गया। आयुर्वेदाचार्य डॉ मधुसूदन शर्मा के निवास स्थान पर आयोजित समारोह में भगवान धन्वंतरि की पूजा-आराधना दीप प्रज्वलित करके की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। स्वास्थ्य संरक्षक अमृत की प्राप्ति का यह पवित्र पर्व धनतेरस जन-जन के लिए उत्तम स्वास्थ्य लेकर आये।
आयुर्वेदाचार्य डॉ. मधुसूदन शर्मा ने बताया कि समुद्र मंथन के दौरान कुल 14 रत्नों की प्राप्ति हुई थी। तेरहवें क्रम में चतुर्भुज धारी धन्वंतरि जी प्रकट हुए थे। जिनके एक हाथ में आयुर्वेद की पुस्तक, दुसरे में वनस्पति यानी कि औषधि, तीसरे में शंख और चौथे हाथ में अमृत कलश था। समुद्र मंथन से विष भी निकला था। देवों के देव महादेव ने विष के सेवन किया था। विषपान करने के बाद शारीरिक दाह मिटाने महादेव जी को भगवान धन्वंतरि ने ही अमृत प्रदान किया। उन्होंने बताया कि भगवान धन्वंतरि के द्वारा ही प्रजापति ब्रह्मा जी के प्रयास से पृथ्वी वासियों को आयुर्वेद ग्रंथ की प्राप्ति हुई। हिमांशु शर्मा ने बताया कि धनतेरस को धन्वंतरि की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु, भय, विभिन्न बीमारियों से मुक्त मिलता हैं और दुःख तथा तकलीफ से छुटकारा मिलता हैं । यह खुशी की बात हैं कि बुजुर्गों के साथ युवा पीढ़ी आज-कल आयुर्वेद चिकित्सा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक स्वर्गीय पंडित गोदावरी शर्मा का स्मरण किया गया और उनके दीर्घायु की कामना धन्वंतरि देवी से की गई। आगंतुक अतिथियों का स्वागत-सत्कार माथे पर तिलक, गले में पुष्षाहार, पान-सुपारी तथा प्रसादी देकर विदा किया गया और बधाई देते हुए स्वस्थ जीवन की कामना की हैं।

