वासु सोनी जांजगीर चांपा। जिले के शासकीय अधिकारी कर्मचारी छुट्टी के दिनों में जनता का फोन उठाना मुनासिब नहीं समझते। जहां तक आम जनता का सवाल रहता है कि कार्यालयीन समय में अधिकारी कर्मचारी कार्यालय का ही काम निपटाते नजर आते हैं। उनके पास जनता के लिए बहुत ही कम समय रहता है। वहीं उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने पर वे किसी का फोन उठाना मुनासिब नहीं समझते। आखिर शासकीय अधिकारी कर्मचारी आम जनता के कार्यों का समय पर संपादन नहीं करते वहीं उनके द्वारा मोबाइल पर संपर्क करें पर फोन भी नहीं उठाते। कभी कभार मोबाइल फोन उठाकर बात कर लें तो बहुत मेहरबानी हो जाती है। जनता के कार्यों के लिए बातें बड़ी बड़ी करने वाले अधिकारी समय पड़ने पर फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझते। कभी कभार यह भी सुना जाता है कि मोबाइल हमारा है हमें शासन ने कोई भी ऐसी सुविधा नहीं दी है लेकिन जब शासन अधिकारी कर्मचारियों को मोबाइल फोन की सुविधा दे भी दे तब भी अधिकारी कर्मचारी अपनी मनमर्जी से ही फोन उठाते नजर आते हैं। जिसके चलते आम जनता को दोनों तरफ से शासकीय अवहेलना का शिकार होना पड़ता है। एक तो शासकीय समय में उनके पास फोन उठाने का समय नहीं रहता और छुट्टी में वे किसी का फोन उठाते नहीं है। ऐसे में आम जनता करे भी तो क्या? वहीं कार्यालय जाने पर इतने बकाया काम रहते हैं कि शासकीय अधिकारी कर्मचारियों को पुराने काम निपटाने में ही सालों लग जाते हैं तब तक नए काम पेंडिग की लिस्ट में शामिल हो जाते हैं। जिसके चलते आम जनता सिर्फ शासकीय कार्यालयों के चक्कर काटने मजबूर रहते है। फिलहाल नगर सहित जिले के कार्यालयों में आए दिन ऐसे मामले देखने और सुनने को मिल रहे है। जिनमें अधिकारी कर्मचारी जनहित की बाते भी पुछने के लिए फोन लगाओ तो सिर्फ घंटी बजती ही रहती है, उठाता कोई नहीं।
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