वासु सोनी चांपा। नगर में इन दिनों अधिकारियों के जलवे बरकरार है। अधिकारियों द्वारा किसी भी विषय में जानकारी लेने और देने के विषय में कुछ भी जानकारी नहीं होने का हवाला दिया जाता है। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है जिसके चलते नगर के लोगों का काम अधूरा पड़ा हुआ है। नगर के अधिकारियों को जानकारी होने के बाद भी अधूरा काम और पेंडेंसी होना अधिकारियों की लापरवाही प्रदर्शित करता है।
नगर में अवैध कार्यों की बाढ़ सी आ गई है। जिसे लेकर अधिकारियों से मौखिक पूछने पर वे सिर्फ यही कहते नजर आते है कि घर की बात है, कोई दिक्कत नहीं है। जिसके चलते नगर में कई अवैध कार्यों को बढ़ावा मिल गया है। वहीं जांच के नाम का हवाला देकर कई कार्यों को ऐसे ही छोड़ दिया जाता है। जिसके कारण नगर में आसानी से हो जाने वाले कार्य अधूरे और पेंडिंग हो जाते है। ऐसे अधिकारियों को किसी ऐसे स्थान पर स्थानांतरण करने की आवश्यकता है जहां वे बिना किसी व्यवधान के आसानी से अपने कार्यों का निर्वहन कर सके। नगरीय सीमा में जनता की आवश्यकताओं के अनेक कार्य रोजाना आते है लेकिन उन कार्यों की अधिकारियों की अनुपस्थिति में पेंडिंग छोड़ना पड़ता है। अब तो जनता कहती फिर रही है कि ऐसे अधिकारियों को नगर की कमान दी जाए जो कर्तव्य के प्रति निष्ठावान हो, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण ऐसे अधिकारियों का नगर की कमान सम्हाल पाना उचित प्रतीत नहीं हो पा रहा है।
शिकायत का इंतजार अधिकारियों को…
नगर में इन दिनों सभी विभाग के अधिकारियों को सिर्फ शिकायत का इंतजार रहता है। किसी भी प्रकार से शिकायत नहीं होने पर वे करवाई तो क्या अपने चेंबर से बाहर निकलना भी मुनासिब नहीं समझते। वहीं कभी अगर उच्च अधिकारियों का आदेश आ जाए तो फिर जो काम नहीं हो रहा वो काम भी आसानी से होना शुरू हो जाता है, जिससे यह प्रतीत होता है कि अधिकारियों को मुफ्त की रोटी की आदत पड़ ही गई है। जिसके चलते जनता भी अधिकारियों को कुछ भी कहने चूक नहीं रही।
हमारे द्वारा प्रकाशित समाचार जिनमें आज तक कार्रवाई करने अधिकारियों को सोचना पड़ रहा है –
(1) नगर के एकमात्र खेल मैदान भालेराव में किसी व्यक्ति या संस्था के द्वारा रेतीनुमा मिट्टी पाट दिया गया। जिसकी जांच आज तक नगर का कोई अधिकारी नहीं कर पाया।
(2) एकमात्र पर्यटन स्थल हनुमान धारा जहां से रेती और मुरूम की चोरी किसके द्वारा की गई और नगर के किस विभाग के अधीन यह चोरी हुई है इसकी भी जांच आज तक नहीं की गई।
(3) हनुमान धारा में रातों रात कई हजार टन राखड़ पाटा जा रहा है इसकी जानकारी भी नगर के किसी अधिकारी को नहीं है, और अगर हो भी तो जांच कौन करेगा ये जांच का विषय है।
(4) देवांगन पारा स्थित हनुमान चौक में गांजा और आधी रात तक पान मसाला का सामान बेचा जाता है लेकिन अधिकारियों द्वारा जांच आज तक नहीं किया गया।
(5) भोजपुर अंडर ब्रिज में पानी भर जाना लेकिन पानी निकासी की व्यवस्था भगवान भरोसे संचालित है आखिर रेलवे और नगर के अधिकारियों ने अपनी आंख मूंद रखी है। जिसके चलते जांच।शायद ही संभव हो।
बहरहाल नगर के किसी भी अधिकारियों के पास इतना समय नहीं की वे इसकी जांच कर सके कि आखिर किसके द्वारा नगर को बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है और इसकी जांच अधिकारियों द्वारा क्यों नहीं की जा रही है? अब देखना यह है कि नगर में कौन ईमानदार अधिकारी है जो जांच की राह छोड़ कार्रवाई करना शुरू करते है।

