
वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा में निविदा का वार शुरू हो चुका है, हालांकि अभी तक कोई अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं हुई है, लेकिन अप्रिय स्थिति से इंकार नहीं किया जा सकता। जिसका कारण कुछ और नहीं बल्कि कमीशन का चक्कर हो सकता है। वहीं गुपचुप तरीके से बंद कमरे और बिना कैमरे वाले स्थानों में अपने चहेते ठेकेदारों को धड़ाधड़ निविदा का काम बांटा जा रहा है। आखिर कितना कमीशन मिलना होता है जिसके चक्कर में बिना आम जनता के जानकारी के साथ ही अन्य निविदा फार्म भरने वालों को उलझा कर निविदा का बंदरबाट किया जा रहा है। 15 जनवरी 2026 को भी निविदा का कुछ ऐसा ही मामला नपा में बंद कमरे में और बिना कैमरे वाले स्थानों पर किया गया लेकिन कमीशन के चक्कर में ना ही जिले के कलेक्टर ने इस मामले में रूचि दिखाई और ना ही नगर पालिका परिषद चांपा के जिम्मेदार अधिकारियों ने? वहीं बंद कमरे में और बिना कैमरे वाले स्थानों में अपने चहेते ठेकेदारों को अधुरा फार्म पूरा करवाकर निविदा बांटने की जानकारी भी नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। 15 जनवरी वाले निविदा को लेकर समाचार प्रकाशन होने और जिले के कलेक्टर को समाचार सोशल मिडिया के माध्यम से भेजने के बाद भी ना ही कोई जानकारी सार्वजनिक की गई और ना ही कोई जांच की गई। जिससे प्रतीत हो रहा है कि उपर से नीचे तक निविदा का पूरा मामला सेट हो चुका है?
क्या चहेते ठेकेदारों को लाभ पहूंचाने बनाया जा रहा नया नियम?
नगर पालिका परिषद चांपा के अंतर्गत होने वाले निर्माण कार्यों की अगर जांच की जाए तो कई खुलासे हो सकते है। वहीं उच्च स्तरीय इंजीनियरों से नगर के निर्माण की जांच कराने पर नगर पालिका के ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों का दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, लेकिन कमीशन का चक्कर बहुत बेकार है बाबु भाई वाली कहावत यहां भी चरितार्थ हो जाती है। वहीं नए नियम को लेकर कुछ ठेकेदारों ने दबी जुबान यह भी कह रहे कि अनुभव वाला नियम कब आ गया। वहीं नपा के इंजीनियर भी कहते हैं कि हम किसी से कम नहीं है। उच्च अधिकारियों ने नियम बनाया है तो हम क्या करें लेकिन ये नियम अभी कहां से आ गया? ऐसा नए नवेले कुछ ठेकेदार सोच रहे हैं। क्योंकि अनुभव के बिना अपने चहेते को छांटकर निविदा का सारा काम दिया जा रहा है। वहीं कुछ राजनीतिक समीकरण भी बिना अनुभव को अनुभव दिला दे रहे है।
बहरहाल नगर पालिका परिषद चांपा में निविदा को लेकर निविदावार शुरू हो चुका है। जिसे लेकर किसी अप्रिय स्थिति निर्मित होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल जिले के अधिकारियों को जानकारी होने के बाद भी अगर वे इससे अंजान बन रहे हैं तो फिर नगर की जनता के लिए चिंता विषय जरूर है। अब देखना यह है कि अधिकारी इस विषय पर कुछ कह पाते हैं या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

