सिग्नेचर करो, कमीशन पाओ की स्कीम नगर पालिका में बदस्तूर जारी, लाखों से भी ऊपर की अवैध कमाई…कौन बताएगा भाई… क्या जिले के कलेक्टर को है जानकारी…

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वासु सोनी चांपा। निविदा को लेकर चल रहे निविदा वार में नगर पालिका सहित जिले के अधिकारी शांत बैठ कर नई स्कीम का आंकलन लगा रहे होंगे? आखिर आम जनता के टैक्स का रुपया बर्बाद जो करना है। वहीं निविदा को लेकर कई बातें सामने आई है जिसमें निविदा फॉर्म भरो, समय बर्बाद करो और निविदाकर्ता का जमा रुपया राजसात करो? लेकिन जनता के समय की बर्बादी का भुगतान कौन करेगा? क्या जिले के कलेक्टर को इसकी जानकारी है, आखिर उन्हें इन सब चीजों से अंजान क्यों रखा जाता है? जब शिकायत होती है तभी सब बातें सामने आती है। कोरबा रोड वार्ड में ओवरब्रिज के अंतिम छोर से लेकर कुछ दूरी तक नाले का निर्माण किया जाना था लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी नाले का निर्माण नहीं किया गया, जबकि नाले के लिए नगरपालिका चांपा द्वारा करोड़ों का निविदा किया गया था। हालांकि वर्ष और रुपयों को लेकर नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी किसी भी प्रकार की जानकारी देने से बच रहे है कि कही कमीशन से वंचित ना हो जाए? बिहान खबर बार बार यही सवाल पूछ रहा है कि जनता का रुपया कमीशन देकर क्यों बर्बाद किया जा रहा है। वहीं सम्भवतः जिले के कलेक्टर को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई होगी? वहीं सालों पहले नाले के बनने से आम जनता का भला हो जाता, लेकिन अधिकारी अपनी जेब गर्म करने के चक्कर में अपने चहेते ठेकेदारों को पूरा संरक्षण दे रहे थे शायद यही वजह रही होगी कि नाले का निर्माण आज तक पूरा नहीं हुआ। वहीं अब कोरबा रोड के नाले का दोबारा निविदा निकाला गया लेकिन नगर पालिका चांपा के पीडब्ल्यूडी शाखा के बाबू द्वारा कई फाइलों को दबाकर मामले को रफा दफा कर दिया जाता है। वहीं विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि नगर पालिका चांपा के पीडब्ल्यूडी शाखा के बाबू द्वारा खुद से आवक जावक रजिस्टर भी बना लिया गया है। जिसकी जानकारी सिर्फ कलेक्टर के पूछने पर ही दी जा सकती है। नगर पालिका चांपा के पीडब्ल्यूडी शाखा के बाबू के आवक जावक रजिस्टर में ऐसा क्या राज दफन है जो जिले के कलेक्टर कहने पर ही बताया जा सकता है?

16 ठेकेदार में 15 अपात्र, सिर्फ 1 पात्र?

जी हां ये नगर पालिका परिषद चांपा है, विश्वस्त सूत्रों के अनुसार आपको बता दें कि नगर क्या देश का कोई भी ठेकेदार फॉर्म भरे तो सिर्फ चहेते ठेकेदार को काम मिल सकता है वह भी नगर का ही होना चाहिए, साथ ही नगर पालिका परिषद चांपा में कार्य किया हुआ होना चाहिए? अब भला निविदा में नए नियमों को भी जगह मिलनी चाहिए जिसमें ये लाइनें भी जुड़ी रहे। चांपा नगर पालिका में जितनी ज्यादा कमीशन उतना ज्यादा निविदा मिल सकता है। कोरबा रोड में बनने वाले नाले को लेकर शायद 16 ठेकेदारों ने फॉर्म भरा था जिसमें 15 ठेकेदार अपात्र हो गए, वही 1 ठेकेदार ही पात्र निकला। आखिर ऐसा क्या था जो 15 ठेकेदार एक साथ अपात्र हो गए। जिसकी जानकारी जिले के कलेक्टर को लेनी चाहिए और सार्वजनिक भी करनी चाहिए।

जांच क्यों नहीं कर पा रहे जिले के मुखिया?

जिले के कलेक्टर अगर चाहें तो विशेष कर्मचारियों की टीम बनाकर जांच कर सकते है लेकिन टीम शायद ही बन पाएगा? सही तरीके से चांपा नगर पालिका परिषद के दस्तावेजों की जांच की जाए तो कई खुलासे हो सकते है। वहीं निविदा का वारा न्यारा वहां किया गया है जहां कैमरा बिल्कुल भी नहीं है?

फिलहाल निविदा के लिए नगर पालिका परिषद चांपा में निविदा वार जारी है। संभवतः नपा के अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा किसी बड़ी घटना की तैयारी की जा रही है। निविदा वार को लेकर किसी बड़ी घटना का अंदेशा प्रतीत हो रहा है।

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