चांपा नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी पत्रकार से कह रहे सबूत दो, वहीं सबूत का जवाब तक नहीं दे पा रहे अधिकारी और कर्मचारी…पढ़िए कैसे आ रहा कमीशन बंद कमरे में? कुछेक पत्रकार क्या कर लेंगे जैसे शब्दों का भी उच्चारण अच्छे से करते नजर आते है…

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वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा में भ्रष्टाचार का काला कारनामा कर अधिकारी और कर्मचारी कहते फिर रहे है सबूत दो, वही सबूत देने पर जवाब देने के बजाय नगर पालिका से भागते फिर रहे है? चांपा नगर पालिका में अधिकारी कर्मचारी कमीशन का ऐसा गंदा खेल खेल रहे है जिसमें नगर में क्या हो रहा है इसकी जिम्मेदारी उठाने के बजाय अपने आप को बचाने का तरीका ईजाद करते रहते है।

तालाब साफ करने का उपाय ढूंढने के बजाय, ढूंढ रहे निविदा का उपाय? 

नगर पालिका चांपा के अधिकारी कर्मचारी सबसे बड़े रामबांधा तालाब को साफ करवाने के बजाय अब निविदा निकालने का उपाय ढूंढ रहे है जिससे उन्हें कमीशन मिल सके?

निविदा दे रहे अपने चहेते समाचार पत्र को? 

कमीशन के लिए कुछ भी करने को तैयार नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ अपने चहेते और जो समाचार पत्र दिखता भी नहीं, ऐसे समाचार पत्र को निविदा दे देते है, जिससे उन्हें भरपूर कमीशन मिलने की गुंजाइश रहती है?

निविदा दे रहे अपने चहेते ठेकेदार को, चाहे हो छोटा या बड़ा? 

कमीशन का खेल ऐसा कि नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी अपने चहेते ठेकेदार को छोटा या बड़ा कोई भी निविदा देने सारे हथकंडे अपनाते नजर आते है, क्योंकि कमीशन जो ज्यादा देंगे, निविदा उन्हीं को जारी किया जाता है, जिसका उदाहरण हनुमान धारा सौंदर्यीकरण विकास कार्य को देखा जा सकता है, जिसके लिए 13 लोगों ने निविदा फॉर्म डाला लेकिन मिला सिर्फ एक को, बाकी लोगों का फॉर्म किसी ना किसी कारण बंद एसी कमरे में बैठकर रद्द कर दिया गया।

ठेका मरम्मत का, काम भी मरम्मत जैसा, कमीशन भरपूर? 

नगर पालिका परिषद चांपा में मरम्मत का कार्य लेने लोगों में होड़ सी मच गई है। लेकिन कार्य उसे ही मिल रहा जो भरपूर कमीशन देगा या पहले ही दे दिया हो? साथ ही जांच नहीं करने का कमीशन भी अलग से दिया जा रहा होगा? जिसके चलते मरम्मत एक दिन में हो जा रहा और तो और जांच कब हो रहा ये भी किसी को पता नहीं चल रहा? आखिर जांच के समय जनता को क्यों नहीं बताते? बिना आए ही जांच पूरी कर ली जा रही है? क्योंकि कमीशन भी पूरा आयेगा?

बहरहाल किसी भी जांच में नगर के किसी व्यक्ति को जानकारी दिए बिना जांच की कार्रवाई पूरी भी कर ली जाती है? क्या नगर की जनता को जानने का हक नहीं है? अगर नगर की जनता को जानने का हक नहीं है तो टैक्स क्यों लिया जा रहा है? ऐसे तमाम सवाल है जिसका जवाब कोई अधिकारी कर्मचारी नहीं दे पा रहा है।

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