वासु सोनी चांपा। अगर आप ये समाचार पढ़ रहे है तो आपको सच्चाई के बारे में पता चल जाएगा, वही पता भी करना पड़ सकता है? विधानसभा सत्र शुरू होते ही नगर सहित जिले के कर्मचारियों की ड्यूटी सिर्फ आंकड़े तैयार करने में लग जाती है। नगर की जनता किसी काम के लिए शासकीय कार्यालय पहुंच भी जाए तो शायद सभी को जवाब यही मिलता है कि बाद में आना विधानसभा की जानकारी बना रहे है?
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ शासन में विधानसभा के सत्र शुरू हो चुका है। जिसमें राज्य के जनप्रतिनिधि जनहित कार्यों की समीक्षा करते है। साथ ही पूरे आंकड़े पक्ष विपक्ष के दायरे में ली जाती है। जिसके लिए नगर सहित जिले और राज्य के शासकीय कर्मचारी विधानसभा चलते तक सिर्फ आंकड़े बनाने में व्यस्त रहते है। बार बार एक सवाल लोगो के जेहन में आता है कि आंकड़े रात में क्यों नहीं बनाते? सुबह आम जनता का काम और रात को आंकड़े बनाने का काम? लेकिन शासकीय कर्मचारी भी आम इंसान ही है। वे सिर्फ नौकरी कर रहे है अब पूरी जिंदगी दिन रात कार्यालय में तो नहीं बिता सकते? यह बातें दोनों ओर से आती है, एक ओर आम जनता तो दूसरी ओर कर्मचारी? जिसमें आम जनता की हार होती है, आना जनता का काम रोक दिया जाता है। जिस जनता के लिए जनप्रतिनिधि और शासकीय कर्मचारी लगे होते है उन्हीं जनता का काम बीच में रोक दिया जाता है और समय पर समय दिया जाता है। अब जनता सिर्फ अपने समय का ही इंतजार करते बैठे है।
नगर पालिका परिषद चांपा में कितना काम पेंडिंग… क्या कलेक्टर साहब को है जानकारी?
एक ओर लगातार जनहित योजना छत्तीसगढ़ सरकार ला रही है तो वहीं आगे पाट पीछे सपाट की स्कीम सभी शासकीय कार्यालयों में जारी है। जिले के कलेक्टर अगर विशेष नियुक्ति कर जांच करवाए तो कई खुलासे आसानी से हो जाएंगे लेकिन वो जांच क्यों कराए, आखिर किसी ने शिकायत भी नहीं की है? बिना शिकायत अगर काम पेंडिंग भी है तो किसी को कोई दिक्कतें नहीं है सिर्फ आम जनता को यही सुनने को मिलेगा कि बाद में आना अभी व्यस्त है बहुत काम है? आखिर ये काम क्या चीज का करते है जो शासकीय कर्मचारियों के पास जनता के लिए समय का पड़ जाता है?
फिलहाल शासकीय अधिकारी कर्मचारियों के पास विधानसभा, जनप्रतिनिधि, शासकीय योजना सहित कई ऐसे काम है जिसके लिए आम जनता को बाद में आना या फिर बहुत व्यस्त है जैसे शब्द सुनने को मिलते है। इसकी जांच करने के लिए भी एक ईमानदार अधिकारी की जिले में नियुक्ति होनी चाहिए? आखिर आम जनता के दिन कब बहुरेंगे, इन्हीं सोच के साथ आम जनता अपना जीवन यापन कर रहे है।
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