वासु सोनी चांपा। नगर को बर्बाद करने के पीछे नगर पालिका परिषद चांपा में बैठे अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार का उच्च स्तरीय हाथ नजर आ रहा है। एक ओर जनता से यह कहा जा रहा कि विकास के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे, तो वहीं दूसरी ओर वह प्रयास विनाश ला रहा है। नगर पालिका में बैठे कर्मचारी का जवाब सुनकर जनता के पैरों तले जमीन खिसक जाए?
ठेकेदारों की मनमर्जी के आगे प्रशासन बेबस?
नगर पालिका परिषद चांपा अंतर्गत आने वाले क्षेत्र हनुमान धारा पर्यटन केंद्र में विकास की इबारत लिखने की बात आ रही है, लेकिन जिन अधिकारियों के भरोसे नगर संचालित होता है वे बंद एसी कमरों में ठंडकता का आनंद ले रहे है, वहीं जांच के नाम पर झुनझुना पहनना पहली प्राथमिकता बन गई है। कलेक्टर कार्यालय में कई महीनों से गए दस्तावेज के बिना हनुमान धारा विकास शुरू भी कर दिया गया है। जांच के नाम पर कोई भी अधिकारी कर्मचारी मौके पर नहीं रहता, सिर्फ कुछ पल के लिए पहुंच जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी? जांच के समय सब सही और जांच के बाद भ्रष्टाचार की पूरी किताब ठेकेदार लिख दे रहे है? संभवतः काम चलने तक इंजीनियरों की टीम लगातार जांच करती रहती है। लेकिन नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारियों के पास कुछ बहुत ही ज्यादा काम का बोझ बढ़ गया है। जिसके चलते ठेकेदारों की मनमर्जी हावी है, वैसे भी नगर पालिका का काम कुछ भी जानकारी के लिए आवेदन देना ही पड़ेगा? साथ ही आवेदन का निराकरण कब होगा ये साहब को मर्जी के ऊपर है। आखिर अधिकारी जो ठहरे साहब, या तो साहब कह देंगे कलेक्टर से जाकर मिलो? जिससे साफ प्रतीत होता है कि ठेकेदारों के कमीशन अधिकारियों पर हावी हो चुका है।

