जांजगीर चांपा जिले के राजस्व अधिकारी कर्मचारी है हम, राजस्व मंडल बिलासपुर के सचिव और अवर सचिव का आदेश किया दरकिनार? क्या मिलेगा प्रार्थी को न्याय?

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जांजगीर चांपा जिले के राजस्व अधिकारी है हम, राजस्व मंडल बिलासपुर के सचिव और अवर सचिव का आदेश किया दरकिनार? क्या मिलेगा प्रार्थी को न्याय?

वासु सोनी चांपा। जिले में अधिकारियों का बोलबाला आसानी से देखा और पढ़ा जा सकता है। जिले के राजस्व अधिकारी राजस्व मंडल की भी नहीं सुनते। साथ ही राजस्व मंडल द्वारा दिए गए आदेश को भी दरकिनार कर कचरे के डिब्बे में डाल देने का हुनर काबिले तारीफ है। बिहान खबर के पास प्रार्थी के द्वारा राजस्व मंडल के कर्मचारियों के खिलाफ दिए गए आवेदन पर राजस्व मंडल के द्वारा कलेक्टर कार्यालय को जारी आदेश के बाद भी क्या कार्रवाई की गई इसकी जानकारी और सूचना राजस्व मंडल को देना जांजगीर चांपा जिले का कोई भी राजस्व अधिकारी कर्मचारी नहीं देना चाहता। आखिर ऐसे अधिकारियों को प्रधानमंत्री या फिर राष्ट्रपति कार्यालय का संरक्षण प्राप्त है ऐसा प्रतीत होता है। जिसके कारण राजस्व मंडल के आदेश की धज्जियां उड़ाना जांजगीर चांपा जिले के अधिकारी और कर्मचारियों का बाएं हाथ का खेल नजर आ रहा है।

राजस्व मंडल के सचिव और अवर सचिव के पत्र का असर बेअसर

जांजगीर चांपा जिले के तत्कालीन राजस्व निरीक्षक और पटवारी की शिकायत प्रार्थी ने माह मई 2025 में राजस्व मंडल बिलासपुर में की थी। जिसकी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत जांजगीर चांपा जिले के अधिकारियों से ली गई। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी तो मिल गई लेकिन जब इस मामले में शिकायत की गई तब राजस्व मंडल के सचिव और अवर सचिव के पत्र को दरकिनार कर ना ही राजस्व मंडल बिलासपुर कार्यालय को जानकारी दी गई और ना ही प्रार्थी को? आखिर जांजगीर चांपा जिले के नहीं बल्कि ब्रह्मांड के सबसे अधिक शक्तिशाली अधिकारी और कर्मचारी कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी? जिस अधिकारी और कर्मचारी के द्वारा अपने ही उच्च कार्यालय के अधिकारी और कार्यालय को जवाब नहीं देना यही साबित करता है।

फिलहाल जानकारी के अभाव में जितनी जानकारी प्रार्थी से प्राप्त हुई है उस आधार पर समाचार प्रकाशित किया जा रहा है। जिला, नगर और संभाग के उच्च अधिकारी या कार्यालय से प्राप्त जानकारी के बाद पुनः आम जनता के सामने जांजगीर चांपा जिले के राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा दी जाने वाली जानकारी प्रकाशित की जाएगी। अब देखना यह है कि सिर्फ प्रार्थी ही परेशान होगा या जिले और संभाग के अधिकारी जानकारी दे पाएंगे? कहीं यह मामला भी सफेद हाथी साबित ना हो जाए?

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