वासु सोनी चांपा। वो कहावत तो सब ने सुनी होगी, जब साईयां भए कोतवाल, फिर डर काहे का…कुछ इसी तर्ज पर हनुमान धारा सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। कहावत को चरितार्थ करने प्रार्थी को दस्तावेज दिए बिना काम तो शुरू करा दिया गया है, लेकिन ठेकेदारों में डर का माहौल बन चुका है कह कोई बड़ी जांच ना बैठ जाए? इसलिए पेटी ठेकेदारों से जल्दबाजी में काम कराया जा रहा है। वहीं काम ऐसा कि सब बेलगाम है। अब जब जिले के कलेक्टर ही काम का बीड़ा उठाए हैं तो किसकी मजाल जो काम को चेक करने पहुंच जाए?
अब आपको बताते चलें कि लगभग 3 करोड़ का काम प्रार्थी द्वारा मांगे गए दस्तावेज के बिना कैसे हो रहा है? सबसे पहले जिस ठेकेदार को काम दिया गया है उनके द्वारा पेटी ठेकेदारों से या अन्य संबंधित ठेकेदारों से काम लिया जा रहा है। जिन्हें काम कैसे शुरू करना है उसकी जानकारी भी नहीं है। सबसे पहले निर्माण स्थल में संबंधित कार्यों का बोर्ड पूरे विवरण के साथ लगाया जाता है, जो आज पर्यंत नहीं लगाया गया है। बिजली, पानी की व्यवस्था सहित समानों के रखरखाव की पूरी जानकारी अलग से रखनी होती है लेकिन बिना इन व्यवस्थाओं के काम शुरू कर दिया गया। वही कुछ दिन पहले शुरू हुए काम में अब जल्दबाजी कर भुगतान का समय आ गया होगा? वहीं निर्माण की गुणवत्ता देखने और परखने नगर पालिका से कोई भी नहीं पहुंच रहे है। सिर्फ ठेकेदार और मजदूरों के भरोसे काम छोड़ दिया गया है। जिससे आप समझ सकते है कि इतनी जल्दी कैसे काम हो रहा है वही भुगतान और फिर कमीशन?
बहरहाल लगभग 3 करोड़ के काम में कमीशन भी ज्यादा और जल्दी के चक्कर में काम विनाश की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है। छुट्टी के दिनों में मोबाइल बंद कर अधिकारी कर्मचारी सिर्फ कमीशन के सपने बुन रहे है? अब देखना यह है कि ये कमीशन का खेल क्या क्या रंग दिखाएगा?

