सौंदर्यीकरण के नाम पर बर्बाद हो रहा हनुमान धारा पर्यटन स्थल, भूमाफिया के साथ सांठ गांठ कर बेची जा रही शासकीय भूमि, हनुमान धारा में अन्य की जमीन खतरे में, शासकीय अधिकारियों की नज़र अन्य भूमि पर?

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वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा अंतर्गत हनुमान धारा सौंदर्यीकरण मामले में अब नया मोड़ आ रहा है। एक ओर सौंदर्यीकरण के नाम पर विनाश लीला रची जा रही है तो वहीं हनुमान धारा के मंदिर की जमीन को कब्जा भी किया जा रहा है। जिसकी जानकारी मंदिर एवं जमीन के सर्वाकर लखन सोनी को होने पर नपा अधिकारी कर्मचारी के साथ बैठक रखी गई। जहां उन्होंने शासकीय भूमि पर निर्माण कार्य की बात कही। जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी और ठेकेदार मिलकर शासकीय भूमि सहित अन्य किसी की भूमि जो दान की है उस पर भी कब्जा करने जिद्द पर अड़े है। हनुमान धारा की शासकीय भूमि पर पर वैसे भी भूमाफिया कब्जा कर रहे है। भूमाफिया से सांठ गांठ कर नगर के अधिकारी कर्मचारी अपनी जेब गर्म करने अलग तरीका निकाल रहे है तो वहीं शासकीय भूमि पर कब्जा होने की जानकारी के बाद भी आवेदन देने के बाद भी आवेदन मांगना। जिले सहित नगर के अधिकारियों की साजिश का सबसे बड़ा उदाहरण है।

नगर पालिका परिषद चांपा, राजस्व विभाग सहित जिले के अधिकारी और कर्मचारियों की नजर हनुमान धारा की शासकीय भूमि पर भूमाफिया द्वारा कब्जा होते देखना है? लगातार समाचार प्रकाशन होने के बाद भी कोई कार्रवाई ना हो पाना, वही किसी प्रकार की कार्रवाई ना कर पाना भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी का साक्षात उदाहरण मानना अतिशयोक्ति नहीं होगी?

दान की भूमि पर नगर पालिका की नजर?

सर्वाकर लखन सोनी ने बताया कि कई वर्षों से इस जमीन पर श्री हनुमान मंदिर बनाकर पूजा अर्चना की जा रही है। वहीं कार्तिक पूर्णिमा के दिन भव्य पिकनिक स्थल भी होता है लेकिन अब सौंदर्यीकरण के नाम पर श्री हनुमान मंदिर की दान से प्राप्त भूमि पर भी नगर पालिका के अधिकारी कर्मचारियों सहित जिले के अधिकारियों की नज़र है।

बहरहाल हनुमान धारा सौंदर्यीकरण मामले में गुणवत्ताहीन कार्य, बिजली चोरी, पानी चोरी, बिना गोदाम, बिना बोर्ड सहित अनेक प्रकार के कार्य अधिकारियों द्वारा कराए जा रहे है? जिससे नगर की जनता से प्राप्त टैक्स का उपयोग सिर्फ बर्बादी के अलावा विनाश लीला लिखने का है? अधिकारियों की तानाशाही के चलते नगर की जनता किसी भी विकास कार्य का उपयोग नहीं कर पा रही है? अब देखना यह है कि और कितना कमीशन अधिकारियों की जेब में बढ़ेगा?

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