वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा का कारनामा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। नगर में अनेकों व्यावसायिक दुकानें संचालित हो रही है, जो नगर पालिका परिषद चांपा के द्वारा किराए पर अनुबंध के तहत दी गई है। नगर पालिका अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा दस्तावेज गायब कर अनुबंध के समय और अनुबंध की राशि अपने जेब में डाली जा रही है। नगर पालिका परिषद चांपा के राजस्व विभाग के पास अनुबंध एवं संबंधित दस्तावेज गायब कर दिया गया है। जिसकी जानकारी लेने पर नगर पालिका सीएमओ के पास जाने कहा जाता है वही नपा सीएमओ जिले के कलेक्टर के पास जाने हिदायत देते है? दुकानों के अनुबंध की जानकारी नहीं देने के एवज में कई लाख रुपए का वारा न्यारा किया जा रहा होगा। वही दस्तावेज की जानकारी मौखिक लेने पर आवेदन देने के बाद दस्तावेज देने कहा जाता है लेकिन नगर पालिका परिषद चांपा से दस्तावेज गायब होना समझ से परे है। आखिरकार नगर पालिका के अधिकारी कर्मचारी अपनी मनमर्जी कब तक चलाते रहेंगे? क्या उन्हें इतना ज्यादा संरक्षण मिल चुका है कि वे दस्तावेज गायब करने सहित उन व्यावसायिक दुकानों को अन्य के द्वारा किराए पर चलाने पर भी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे है। बल्कि उन दुकानों से अवध वसूली की बात सामने आ रही है?
बहरहाल नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारी नगर को विनाश की ओर लगातार धकेलते जा रहे है? कही ऐसा ना हो कि नगर को जनता नगर पालिका अधिकारी कर्मचारियों की गुलाम बनकर रह जाए?

