मेरी मर्जी…पद कुछ और, काम कुछ और…जानकारी नहीं फिर भी करा रहे काम… ऊंची पहुंच या पारिवारिक रिश्तेदारी निभा रहे अधिकारी… दस्तावेज देने से खुल सकती है कइयों की पोल…

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वासु सोनी चांपा। नगर की व्यवस्था और विकास पर ग्रहण ऐसा लग रहा है मानो कुछ दिन बाद नगर का विनाश होना निश्चित हो? चांपा नगर की बात करें तो भ्रष्टाचार इतना ज्यादा हावी हो चुका है कि सही विकास की जगह जल्दी रुपए कमाने की लालसा लगी है। वहीं नगर पालिका परिषद चांपा में कौन किस पद पर क्या काम कर रहा है, उसकी भी जानकारी किसी को नहीं है? कुछ को यही कहते सुना जाता है कि सब अपने है लेकिन कर्मचारी अपनापन छोड़ नियम की बात करते है?

आपको बता दें कि नगर पालिका परिषद चांपा में नियमित, अनियमित और प्लेसमेंट की बात करें तो नगर पालिका सिर्फ जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद करने पर तुला हुआ है। जहां ज्वाइनिंग किसी और पद की, काम किसी और पद का और तो और वेतन उनका सुन और देख लें तो पैरों तले जमीन खिसक जाए?

पद नहीं फिर भी करा रहे दूसरा काम, कहीं ऊंची पहुंच या अधिकारी के परिवार से तो नहीं…

नगर पालिका परिषद चांपा की बात करे तो कई जमे हुए और कई रिटायर हो चुके लोगों का काला किस्सा सुन लें तो दांतों तले उंगलियां चबा ले? सूत्रों के अनुसार नगर पालिका परिषद चांपा में दबे राज का खुलासा हो तो पता चले कि कइयों ने तो पेन से अपना पद और वेतन तक सुधार दिया है? अब वही काम कुछ और लोग करने की कोशिश कर रहे है। कुछ तो ऐसे पदों पर भर्ती हुए है जिसकी जरूरत कई नगर पालिका को है ही नहीं? फिर भी ऊंची पहुंच और पारिवारिक रिश्तेदारी के चलते नगर पालिका में काम दे दिया गया है?

कलेक्टर जांच करे तो पता चले, जिन्हें जानकारी नहीं वे बैठे है बड़े पदों पर…

नगर पालिका परिषद चांपा में वर्तमान समय में कौन किस पद पर बैठा है, नगर की जनता जब नगर पालिका पहुंचती है तो उन्हें कहा जाता है कल आना, आज साहब नहीं है, लेकिन वास्तविक बात यह होती है कि उन्हें कुछ जानकारी ही नहीं होती है? इसलिए नगर की जनता को कुछ जानकारी नहीं दे पाते। आखिर जांच करे भी तो कौन? जिनको जांच का जिम्मा दिया जाता है वे भी उन्हीं साथ मिल जाते है? पुराने दस्तावेजों की जांच अच्छे से हो तो कई दबे राज सामने आने की संभावना बन सकती है? वही कइयों की नौकरी पर भी बन सकती है?

क्यों नहीं भेज रहे मूल पद और मूल स्थान पर…

नगर पालिका परिषद चांपा में कई कर्मचारी दूसरे स्थानों से अटैच में काम कर रहे है। जिन्हें बहुत ही ज्यादा लाभ मिल जा रहा है लेकिन नगर की जनता का काम नहीं हो पा रहा है। समय के पहले ही जाने वालों की बड़ी लंबी फेहरिस्त निकल सकती है परन्तु जांच करे कौन, ये सोच का विषय है?

बहरहाल जांच होगी या बड़े साहब भी उन्हीं के इशारों पर काम करेंगे यह देखने वाली बात होगी?

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