गलती किसकी? सजा क्या मिलेगी? मिलेगा अभयदान या वरदान? भाजपा या प्रशासन इस विषय पर क्या कार्रवाई कर पाएगी? मुनादी की जवाबदारी किसकी थी और क्यों नहीं कराई गई मुनादी? जवाब का इंतजार जनता को…

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वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा, दिन गुरुवार समय दोपहर के लगभग 1 बजे के आसपास, नगर पालिका परिषद चांपा का सभाकक्ष…
गुरुवार की दोपहर नगर पालिका परिषद चांपा के सभाकक्ष में नगर के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पवन कोसमा, तहसीलदार प्रशांत पटेल, नगर पालिका के अध्यक्ष प्रदीप नामदेव, इंजीनियर योगेश राठौर सहित भाजपा के सभी पार्षदगण, भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता, कुछ विभाग के कर्मचारी विभागीय सामग्री के साथ सभाकक्ष में मौजूद हुए। कुछ समय बाद हंगामे के बाद कार्यक्रम की औपचारिकता पूरी कर ली गई।
आपको बता दें कि सभाकक्ष में एक फ्लैक्स बैनर लगा हुआ था जिसमें लिखा हुआ है – विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के 3 दिवसीय शिविर, 18 जून 2026 से 20 जून 2026 तक, प्रमुख योजनाएं (केवल केंद्र सरकार के) 9 योजनाएं नाम सहित लिखी हुई। स्थान नगर पालिका परिषद चांपा के सभाकक्ष में, सुबह 11 बजे से लिखी हुई टंगी थी।
जिसके नीचे अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पवन कोसमा, तहसीलदार प्रशांत पटेल, नगर पालिका के अध्यक्ष प्रदीप नामदेव, इंजीनियर योगेश राठौर सहित भाजपा के सभी पार्षदगण, भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता, कुछ विभाग के कर्मचारी विभागीय सामग्री के साथ सभाकक्ष बैठे थे। कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ लेकिन कुछ ऐसी बाते जो चुभने लगी कुछ ने कह दी, बाते ऐसी थी कि जिस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था वह किसके लिए था? क्या आयोजन अधिकारी कर्मचारी, भाजपा के पदाधिकारी कार्यकर्ता और विभागीय लोगों के लिए थी? कुछ बहस के बाद कार्यक्रम प्रारंभ कर दी गई, सभी अपने अपने स्थान में वापस चले गए, नगर पालिका के अधिकारी कर्मचारी अपने कमरे में आ गए। एसडीएम और तहसीलदार भी अपने कार्यालय वापस लौट गए। नगर पालिका परिषद चांपा में कुछ समय माहौल गर्म रहा बाद में मामले का पटाक्षेप हो गया।
आखिर क्यों हुआ बहस और किस चीज की रह गई थी कमी कार्यक्रम में?
नगर पालिका परिषद चांपा के सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम के प्रारंभ को लेकर सभी अधिकारी कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंचे, जहां कार्यक्रम देश के प्रधानमंत्री के नाम से संचालित योजनाओं को जन जन तक पहुंचाने का था लेकिन नगर के किसी भी विभाग के किसी भी अधिकारी कर्मचारी द्वारा जन जन तो दूर नगर के किसी व्यक्ति के कानों तक कार्यक्रम से संबंधित कोई भी जानकारी या प्रचार प्रसार नहीं किया गया था। आखिर कार्यक्रम देश के प्रधानमंत्री के नाम से संचालित योजनाओं के बारे में था। कार्यक्रम में पहुंचे सभी अधिकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधि, भाजपा के पदाधिकारी कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों से पूछ लिया आखिर किसके द्वारा मुनादी कराई गई है तब जवाब शायद किसी के पास नहीं था, आखिर यह कार्यक्रम किसके लिए आयोजित था। जब किसी ने नगर में मुनादी नहीं कराई तो कोई आयोजन में पहुंचेगा कैसे? इन सब सवालों से तीखी नोंकझोंक और बहस के बीच कार्यक्रम शुरू कर दिया गया।
बहरहाल योजनाओं के बारे में किसे और कब जानकारी दी जाएगी ये सोच का विषय है? आखिर अधिकारियों ने इतनी बड़ी गलती की कैसे? क्या जिले के कलेक्टर इस विषय पर कोई संज्ञान लेकर कार्रवाई कर पाएंगे? क्या भाजपा इस विषय पर कोई नाराजगी जाहिर कर पाएगी? ऐसे तमाम सवालों के बीच अधिकारी कर्मचारी क्या करेंगे यह देखने वाली बात होगी? या हर मामले के जैसे यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

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